Saturday , June 15 2024

पीएसआईईसी प्लाट अलाटमैंट मामले में विजिलेंस ने एक अन्य आरोपी को किया गिरफ्तार

आरोपी ने सरकारी खजाने के साथ की 1,52,79,000 रुपए की धांधली
खबर खास, चंडीगढ़ :
पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने पंजाब स्माल इंडस्ट्रीज एक्सपोर्ट कारपोरेशन (पीएसआईईसी) के औद्योगिक प्लाट की अलाटमैंट में हुए गबन के संबंधी आज लुधियाना के माडल टाउन निवासी अवतार सिंह को गिरफ्तार किया है जिसने अपने निजी फायदे के चलते प्रदेश सरकार के खजोन में 1,52,79,000 रुपए का नुक्सान करवाया है।
इस मामले में विजिलेंस प्रवक्ता ने बताया कि इस संबंध में पीएसआईईसी के अधिकारियों /कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों के खिलाफ 8 मार्च को आईपीसी की धारा 09, 420, 465, 467, 468, 471, और 120- बी और भ्रष्टाचार रोकू कानून की धाराओं 13( 1 (ए) सहित 13(2 के अंतर्गत एसएएस नगर मोहाली में मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि पीएसआईईसी के समकालीन सीजीएम सुरिंदरपाल सिंह, जीएम जसविंदर सिंह रंधावा और पीएसआईईसी के अन्य अधिकारियों/कर्मचारियों ने निजी व्यक्तियों और प्रापर्टी डील्रों के साथ मिलीभगत कर औद्योगिक प्लाट की अलाटमैंट में धांधली की थी। इसके साथ उन्होंने अपने निजी फायदे के लिए राज्य सरकार को करोड़ों रुपए का भारी नुक्सान पहुँचाया।
प्रवक्ता ने बताया कि आरोपी अवतार सिंह और उसके बेटे दमनप्रीत सिंह औद्योगिक प्लाट की खरीदो-फरोख्त का कारोबार करते हैं ने सीजीएम सुरिन्दरपाल सिंह और जीएम जेएस रंधावा के साथ मिल कर फेज 8 बी, इंडस्टरियल एरिया, एसएएस नगर में पीएसआईईसी के 1389 वर्ग गज़ के प्लाट नंबर ई- 261, को मैसर्ज सुखमनी इंटरप्राईज़ज़ के नाम पर अलाट करने में धांधली की। उन्होंने दमनप्रीत सिंह के नाम पर चंडीगढ़ स्थित फ़र्ज़ी पते का प्रयोग कर केवल 1265 प्रति वर्ग गज. कीमत पर तारीख़ 13. 07. 2004 को उक्त प्लाट हासिल किया था।
पी.एस.आई.ई.सी. के नियमों और अलाटमैंट पत्र के अनुसार, यदि अलाटमैंट के तीन महीनों के अंदर- अंदर अलाटी ( खरीदने वाले) द्वारा कुल रकम का 30 प्रतिशत भुगतान नहीं किया जाता तो प्लाट की अलाटमैंट रद्द कर दी जानी चाहिए थी परन्तु, ऐसा नहीं किया गया। इसके इलावा, अवतार सिंह ने शुरुआती 10 फीसद बयानो की रकम संचित करने के बाद पीएसआईईसी को अन्य कोई रकम संचित नहीं करवाई। इसके इलावा इस प्लाट की अलाटमैंट की तरीकें को बार- बार बदला गया।
वक्ता ने आगे खुलासा किया कि अवतार सिंह ने जीएम जे.एस.रंधावा और सीजेएम सुरिन्दरपाल सिंह की मिलीभुगत के साथ यह प्लाट 2016 में असली ख़रीद रेट 1265 प्रति वर्ग गज़ पर आगे बेच दिया था जबकि 2013 में इसकी कीमत 11, 000 प्रति वर्ग गज़ था। केस की जांच में पता लगा है कि पीएसआईईसी अधिकारियों/ कर्मचारियों और एक प्रापर्टी डीलर अवतार सिंह ने सरकारी खजाने को सीधे तौर पर 1 52,79, 000 रुपए का नुक्सान पहुँचाया। इसके इलावा अवतार सिंह, जी.एम.जे.एस. रंधावा और सी.जी.एम. सुरिन्दरपाल सिंह ने 2016 में उक्त प्लाट की फ़रोत और रद्दोबदल करके करोड़ों रुपए की रिश्वत ली थी। इस मामले की आगे वाली जांच जारी है।