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‘मोदी की गारंटी’ के लिए किए करोड़ों खर्च!

विदेशी समचार चैनल की रिपोर्ट में खुलासा
बीते साल नवंबर से 15 मार्च तक सीबीसी ने राजनीतिक विज्ञापनों पर खर्च किए सबसे अधिक 314 मिलियन रुपए
दूसरे नंबर पर रही भाजपा ने किए 275 मिलियन रुपए
केंद्रीय संचार ब्यूरो का उद्देश्य सरकारी योजनाओं को बढ़ावा देन पर इसके विज्ञापनों में भाजपा के नारे हुए थे लगे क्योंकि एजेंसी गूगल विज्ञापनों पर चुनाव-पूर्व खर्च करने वाली शीर्ष कंपनी बनी
मुंबई :
बीते साल चुनाव की सगुबुगाहट के साथ ही जैसे ही चुनाव अभियान ने आकार लेना शुरू किया तो भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि घड़ने के लिए एक नारा गढ़ा गया ‘मोदी की गारंटी’। इस नारे का मकसद था मतदाताओं के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय व्यक्तित्व और व्यक्तिगत वादे के रूप में भरोसा पैदा करना, साथ ही विपक्षी दलों और गठबंधनों को निशाने पर लेना। ‘मोदी की गारंटी’ टैगलाइन के साथ भाजपा ने नवंबर के तीसरे सप्ताह गूगल पर विज्ञापन लाँच किए। लेकिन खास बात यह है कि मोदी की छवि को मजबूत दिखाने के लिए इन विज्ञापनों पर जो मोटा पैसा खर्च किया गया वह देश के करदाताओं की जेब से निकाला गया था और केंद्रीय एजेंसी यानि केंद्रीय संचार ब्यूरो की ओर से खर्च किया गया जिसका काम सरकार की योजनाओं का विज्ञापन होता है न कि किसी पार्टी विशेष का। इसका खुलासा एक विदेशी समाचार चैनल की रिपोर्ट में हुआ है।चैनल की रिपोर्ट की माने तो इस सरकारी ऐजंसी ने चार महीनों के भीतर गूगल विज्ञापनों पर लगभग 387 मिलियन रुपए खर्च कर दिए। यह सिलसिला तब शुरू हुआ जब उसने पहली नंवंबर 2023 से 15 मार्च 2024 तक ऑनलाइन प्लेटफार्म पर नियमित रूप से विज्ञापन देना शुरू कर दिया। उसके बाद देश के चुनावों की औपचारिक घोषणा 15 मार्च से हो गई। तब से सरकारी एजेंसियों को किसी भी विज्ञापन देने से रोक दिया गया है।
दरअसल, इन 113 दिनों में सीबीसी गूगल पर राजनीतिक विज्ञापनों पर भारत का सबसे बड़ा खर्चकर्ता था, जबकि बीजेपी 314 मिलियन रुपये ($3.7m) के साथ दूसरे स्थान पर रही। Google विज्ञापन पारदर्शिता डेटा के अनुसार, इस अवधि में सीबीसी खर्च 275 मिलियन रुपये ($ 3.3 मिलियन) से 41 प्रतिशत अधिक था, जो प्राथमिक विपक्षी कांग्रेस पार्टी ने लगभग छह वर्षों में – जून 2018 और 15 मार्च, 2024 के बीच खर्च किया था।
इसे लेकर 22 मार्च को विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय कांग्रेस ने चुनाव आयोग को एक शिकायत दर्ज कर यह आरोप लगाया था कि इन सीबीसी विज्ञापनों ने सत्ताधारी पार्टी के अभियान में सार्वजनिक धन का दुरुपयोग करके चुनाव नियमों का उल्लंघन किया है।