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शिअद की चंडीगढ़ इकाई चट्‌टान की तरह खड़ी है पार्टी के साथ : कलेर

शिअद की चंडीगढ़ इकाई के नेताओं ने लोगों को गुमराह करने के लिए हरदीप सिंह बुटरेला की निंदा की
उनके साथ सिर्फ चार निजी दोस्त हैं: पीरमोहम्मद, भुल्लर
खबर खास, चंडीगढ़ :
शिरोमणी अकाली दल चंडीगढ़ इकाई के पार्टी नेताओं ने आज हरदीप सिंह बुटरेला की यह दावा करके लोगों को गुमराह करने के लिए कड़ी निंदा की है कि पार्टी इकाई ने शिरोमणी अकाली दल का साथ छोड़ दिया है और कहा कि यूटी इकाई के सभी नेता और पदाधिकारी पार्टी के साथ चटटान की तरह खड़े हैं तथा पार्टी अध्यक्ष सरदार सुखबीर सिंह बादल द्वारा लिए गए किसी भी निर्णय का पालन करेंगें।आज यहां एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए अकाली दल के मुख्य प्रवक्ता अर्शदीप सिंह कलेर और वरिष्ठ नेता करनैल सिंह पीरमोहम्म्द और हरजीत सिंह भुल्लर ने कहा कि चंडीगढ़ से पार्टी के उम्मीदवार- हरदीप सिंह बुटरेला ने गलत दावा किया है कि उनके साथ पूरी पार्टी इकाई ने अकाली दल से इस्तीफा दे दिया है। उन्होने कहा कि जो लोग बुटरेला के साथ गए हैं , वे उनके निजी दोस्त हैं ओर पार्टी में किसी भी पद पर नही हैं। इन नेताओं ने मीडिया के सामने विभिन्न विंगों के अध्यक्षों के नाम का खुलासा किया, जो आज अकाली दल मुख्यालय में मौजूद थे।
नेताओं ने कहा कि केवल अकाली दल जैसी पार्टियां जो सिद्धांतों पर खड़ी रहती हैं, वे ही लोगों को फायदा पहुंचा सकती हैं उन्होने कहा कि बुटरेला जैसे अवसरवादी नेता कभी भी लोगों को धोखा नही दे सकते, चाहे वे किसी भी पार्टी में शामिल हों। उन्होने कहा कि यह बेहद निंदनीय है कि बुटरेला देश में अन्य पार्टियों के नेताअेां को लुभाने के लिए चलाए जा रहे एक भयावह अभियान का हिस्सा बन गए हैं और यह प्रवृति चंडीगढ़ में भी शुरू हो गई है, क्योंकि सत्तारूढ़ भाजपा , अकाली दल को कमजोर करना चाहती है जो हमेशा अधिकारों के बारे में बात करता है। उन्होने कहा कि यह साजिश कभी सफल नही होगी और अकाली दल एक क्षेत्रीय पार्टी के रूप में राज्य के अधिकारों के लिए काम करना जारी रखेगी।
पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए एडवोकेट कलेर ने कहा कि आप पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने देश में एक अलग मिसाल कायम की है, जिसकी इतिहास में कोई मिसाल नही है। वह पहले मुख्यमंत्री हैं, जिन्होने जेल में रहने के बावजूद पद से इस्तीफा देने की नैतिकता नही दिखाई है। उन्होने कहा कि केजरीवाल नैतिकता पर बड़े-बडे़ दावे करते थे, लेकिन ये सभी दावे धरे के धरे ही रह गए हैं।