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संगरूर नकली शराब मामला : आरोपी ‘शाही’ ब्रांड लेबल वाली बोतलों में बेच रहे थे मेथनाल

पुलिस ने आठ आरोपियों में से दो मास्टरमाइंड चढ़े पुलिस के हत्थे, पुलिस ने इस मामले में उत्पाद शुल्क अधिनियम की धारा 61ए लगाई जिसमें आजीवन कारावास या मौत की सजा का है प्रावधान, बोले एडीजीपी ढिल्लों
पुलिस टीमों ने नोएडा स्थित फैक्टरी से प्राप्त 300 लीटर मेथनाल में से 200 लीटर से अधिक मेथनाल किया बरामद
खबर खास, चंडीगढ़ :
‘संगरूर जिले में 20 लोगों की जान लेने वाली जहरीली शराब में मेथनॉल पाया गया – जो औद्योगिक उत्पादों में इस्तेमाल होने वाला एक घातक रसायन है, जिसे आरोपी व्यक्तियों ने नोएडा स्थित एक फैक्ट्री से फैक्ट्री में उपयोग के लिए खरीदा था।’ यह कहना है एडीजीपी कानून व्यवस्था गुरिंदर सिंह ढिल्लो का, जो इस मामले में जांच के लिए गठित एसआईटी का नेतृत्व कर रहे हैं। आज यहां चंडीगढ़ मं पंजाब पुलिस मुख्यालय में वह पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे। उनके साथ एसआईटी सदस्य और एसएसपी संगरूर सरताज सिंह चहल भी उपस्थित थे।
एडीजीपी के मुताबिक संगरूर पुलिस ने इस संदर्भ में तीन अलग-अलग मामले दर्ज करने के साथ ही अब तक कुल 10 आरोपियों में से आठ आरोपियों जिसमें दो मास्टरमाईंडों शमिल हैं, को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान संगरूर के गांव उभावल के गुरलाल सिंह और पटियाला के गांव ताइपुर के हरमनप्रीत सिंह के तौर पर हुई है। दोनों मास्टरमाइंडों का आपराधिक इतिहास है और संगरूर जेल में रहते हुए वे एक-दूसरे से जान पहचान हुई।
इसके अलावा पुलिस ने जिन छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है उनमें मनप्रीत सिंह उर्फ ​​मणि और सुखविंदर सिंह उर्फ ​​सुखी, दोनों दिड़बा के गुज्जरां गांव के निवासी हैं। इसके अलावा चीमा के चौवास निवासी सोमा कौर, राहुल उर्फ ​​संजू और प्रदीप सिंह उर्फ ​​बाबी, गांव रोगला का अर्शदीप सिंह उर्फ ​​अर्श को गिरफ्तार किया है। पुलिस टीमों ने उनके कब्जे से 200 लीटर मेथनॉल रसायन, खाली शराब की बोतलें, बोतल के ढक्कन और नकली शराब के निर्माण और लेबलिंग के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले अन्य उपकरण भी बरामद किए हैं।
एडीजीपी गुरिंदर सिंह ढिल्लों ने बताया कि आरोपी हरमनप्रीत नोएडा स्थित फैक्ट्री से मेथनॉल केमिकल खरीदकर अपने घर पर नकली शराब तैयार करता था और शराब ब्रांड “शाही” का हिंदी में लेबल लगाकर बेचता था। आरोपी ने घर पर प्रिंटर का उपयोग करके ब्रांड लेबल तैयार किए, जबकि बोतल कैप लगाने की मशीन उसने लुधियाना से खरीदी थी।
उन्होंने कहा कि मास्टरमाइंड नकली शराब बेचने के लिए स्थानीय संपर्क मनप्रीत सिंह उर्फ ​​मणि (गिरफ्तार) का इस्तेमाल कर रहे थे। उन्होंने कहा आरोपी आधी कीमत पर नकली शराब बेचने के लिए मजदूर वर्ग के लोगों को निशाना बना रहा था।

एडीजीपी ने कहा कि पुलिस के पास इस घातक रसायन की खरीद के संबंध में कागजात हैं और पुलिस ने उन कारखानों की भूमिका की जांच करने के लिए भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 120-बी जोड़ दी है, जहां से उन्होंने मेथनॉल की खरीद की थी। आरोपियों ने कुल 300 लीटर मेथनॉल रसायन खरीदा था।
एडीजीपी ने कहा कि पुलिस ने तीनों एफआईआर में उत्पाद अधिनियम की कड़ी धारा 61-ए भी लगाई है। उन्होंने कहा कि धारा 61-ए में आजीवन कारावास/मृत्युदंड का प्रावधान है।
उन्होंने आश्वासन दिया कि एसआईटी जांच को तार्किक निष्कर्ष तक ले जाने के लिए सभी कोणों से मामले की सावधानीपूर्वक जांच करेगी और समय पर अदालत में चालान पेश किया जाएगा। इस बीच, एसआईटी प्रमुख ने प्रभावित और आसपास के गांवों के निवासियों से अनधिकृत स्रोतों से खरीदी गई शराब का सेवन करने से परहेज करने की अपील की।

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