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Breaking : सीटीपी पंकज बावा, बाजवा डिवेल्पर्ज के मालिक, सेवानिवृत पटवारी लेखराज पर विजिलेंस ने किया मामला दर्ज

पंकज बावा को विजिलेंस पहले ही कर चुकी है गिरफ्तार
खबर खास, चंडीगढ़ :
विजिलेंस ब्यूरो ने भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में गमाडा के चीफ टाउन प्लानर पंकज बावा, सनी इनक्लेव और बाजवा डिवेल्परर्ज के मालिक जरनैल बाजवा के अलावा सेवानिवृत्त पटवारी लेखराज के खिलाफ मामला दर्ज किया है। गमाडा के इस अधिकारी और पूर्व पटवारी पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग कर शहर में रिहाईश और कर्मिशियल प्रोजेक्ट के नाम पर बाजवा डिवेल्परर्ज के मालिक जरनैल बाजवा को फायदा पहुचा कर सरकार को करोड़ों का चूना लगाया है। मोहाली विजिलेंस ब्यूरो ने सीटीपी पंकज बावा, जरनैल बाजवा और लेखराज के खिलाफ आईपीसी की धारा 409, 420, 467, 468, 471, 120बी और पीसी एक्ट 13-1ए, 13-2 के तहत मामला दर्ज किया है। मामले की जांच विजिलेंस के उप कप्तान सरवनजीत सिंह बराड़ कर रहे हैं।
गौर रहे कि बीते रोज सीटीपी पंकज बावा को खरड़ के एक रियल इस्टेट कारोबारी को अपना पद का दुरुपयोग कर लाभ पहुंचाने के आरोप में सस्पेंड कर दिया गया था और आज उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया गया था। इसी मामले में अब विजिलेंस ने कार्रवाई करते हुए बाजवा डिवेल्परर्ज के मालिक जरनैज बाजवा और सेवानिवृत पटवारी के खिलाफ भी आज मामला दर्ज कर लिया है। आरोप है कि बाजवा डिवेल्परर्ज की ओर से गांव सींहपुर, हसनपुर और गांव जंडपुर मोहाली में करीबन 179 एकड़ जमीन का रिहाईश और कमर्शियल प्रोजेक्ट पास करवाया गया था। उस समय सरकार की 22 मार्च 2013 को एम्पार्वड कमेटी प्रोजेक्ट की हुई बैठक में फैसले के मुताबिक प्रमोटर बाजवा डिवेल्परर्ज की ओर से कैंसर रिलीफ फंड के तौर पर प्रोजेक्ट की कीमत का एक फीसद या अधिक से अधिक 1 करोड़ रुपए सरकार के पास जमा नहीं करवाया। लेकिन इस मामले में मिलीभगत के चलते कार्यालय मेगा प्रोजेक्ट पुड्‌डा के अधिकारियों या कर्मचारियों की ओर से कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई।
आरोप यह भी है कि गमाडा के सीटीपी और अन्य की मिली भगत के चलते बाजवा डिवेल्पर्ज की ओर से रिहाईशी मेगा प्रोजेक्ट सेक्टर 120, 123, 124 और 125 के लेआउट प्लान में ईडब्लूयएस अधीन 9.09 एकड जमीन पास हुई और इस जमीन में से कुछ जमीन की रजिस्टरी अभी तक गमाडा के नाम नहीं करवाई। और कुछ मामले में बाजवा डिवेल्परर्ज की ओर से उन जमीनों का इंतकाल सात साल बीत जाने के बावजूद गमाडा के नाम पर दर्ज नहीं हुआ और यह जमीन बाजवा डिवेल्पर के नाम पर ही मौजूद है और इस मामले में भी गमाडा की ओर से कर्रवाई नहीं की गई।
बाजवा के गोरखधंधे में मुख्य टाउन प्लान मोहाली के अधिकारी और और कर्मचारी पूरा सहयोग कर रहे थे। इन्हीं लोगों की मिलीभगत से गांव सींहपुर की जमीनों का सीएलयू जारी नहीं हुआ था। लेकिन जरनैल सिंह बाजवा ने उस समय के डीटीपी पंकज बावा जोकि अब सीटीपी हैं और सहायक नगर योजनकार रघबीर सिंह और पटवारी लेखराज से मिलीभगत कर सीएलयु करवाए बिना लेआउट प्लान पास करवा लिया। लेखराज पटवारी पर इन कागजों में हेरफेर का आरेाप है। इसके अलावा आरोप यह भी है कि मुख्य नगर योजनाकार पंजाब के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से बाजवा डिवेल्पर्ज ने विभिन्न व्यक्तियों की जमीनों को उनकी सहमित के बगैर ही नकली कंसैंट लगाकर लेआउट प्लान में पास करवा लिया। जबकि गांव जंडपुर की जमीन में दो एकड जोकि समाधि पुखता बाबा गुलाबदास चेला बैजलदास के नाम पर दर्ज थी, उसका भी नकली कंसैंट बाजवा ने बड़े शातिराना ढंग से बनवा कर उस जमीन को भी अपने नाम कर लिया। बाजवा डिवेल्पर्स ने वर्ष 2014, 2015 के दौरान सैक्टर 123 के अप्रूवल मेगा प्रोजैक्ट में करीबन 78 कमिर्शयल बूथों का निर्माण बिना नक्श पास करवाए किया जिससे सरकार को करोड़ों रुपए का वित्तीय नुकसान हुआ।
उक्त शिकायत की जांच के बाद विजिलेंस ने जरनैल बाजवा, तत्कालीन डीटीपी एसएएस नगर और मौजूदा सीटीपी पंकज बावा, तब के पटवारी लेखराज (अब सेनानिवृत्त) के खिलाफ मोहाली में मामला दर्ज किया है। पुलिस अब इस मामलें में यह जांच कर रही है कि इसमें गमाडा के किसी अन्य अधिकारी और कर्मचारी के अलावा किसी अन्य की कोई भूमिका तो नहीं है।

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