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यूपी: सामूहिक शादी समारोह में दूल्हा-दूल्हन की तरह फर्जी जोड़ों को बैठाया, दो अधिकारियों सहित 15 लोग गिरफ्तार

लखनऊ. यूपी में सरकार की सामूहिक शादी अनुदान योजना में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा का मामला सामने आया है. राज्य के बलिया में फर्जी दूल्हों के साथ शादी कराया गया है. एक वीडियो में दर्जनों दूल्हनें कथित दूल्हों के गले में वरमाला डाल रही हैं लेकिन दूल्हे अपना चेहरा छिपाते नजर आ रहे हैं तो कुछ दुल्हन स्वयं ही वरमाला अपने गले में डालती नजर आ रही हैं. 25 जनवरी को बलिया में सामूहिक शादी समारोह का आयोजन किया गया था.

इस समारोह में बीजेपी विधायक केतकी सिंह मुख्य अतिथि थीं. बताया जा रहा है कि अनुदान हड़पने के लिए विभागीय मिलीभगत से यह शादियां कराई गई हैं. हालांकि, मामला सार्वजनिक होने के बाद इस विवाह धोखाधड़ी में कथित संलिप्तता के लिए दो सरकारी अधिकारियों सहित 15 लोगों को अरेस्ट किया गया है.

568 जोड़ों की शादी

बलिया में बीते 25 जनवरी को 568 जोड़ों की शादी, यूपी सरकार के सामूहिक विवाह योजना के अंतर्गत कराई गई थी. लेकिन इस सामूहिक समारोह में काफी संख्या में फर्जी जोड़ों को बैठाकर शादी अनुदान को हड़पने के लिए शादी कराई गई. कुछ दूल्हा व दूल्हनों को पेमेंट देकर शादी कराने वाले गैंग ने लाया था. बताया जा रहा है कि दूल्हे और दुल्हन के रूप में समारोह में भाग लेने के लिए अधिकारियों व दलालों ने महिलाओं और पुरुषों को 500 रुपये से लेकर 2 हजार रुपये तक का भुगतान किया था.

सामूहिक शादी में कई दुल्हनों ने स्वयं वरमाला पहन ली

फर्जीवाड़ा का आलम यह था कि समारोह में मौजूद कई दुल्हनों को जब उनका जोड़ीदार नहीं मिला तो उन लोगों ने वरमाला खुद ही पहन ली. एक 19 साल के युवक ने बताया कि वह शादी समारोह को देखने गया था लेकिन उसे पैसा की पेशकश करते हुए वहां दूल्हा के रूप में बैठा दिया गया. उसने बताया कि उसकी तरह दर्जनों युवकों को ऐसी पकड़कर अधिकारियों और दलालों ने बैठा दिया.

गरीब लड़कियों की शादी के लिए 51 हजार रुपये देती

दरअसल, यूपी सरकार में गरीबों के परिवार की लड़कियों की शादी का खर्च सरकार वहन करती है. शादी अनुदान योजना के तहत 51 हजार रुपये का सामान नवदंपत्ति को दिया जाता है.

जांच कमेटी गठित

फर्जी शादी समारोह के खुलासा वाला वीडियो वायरल होने के बाद जिला प्रशासन के हाथ पांव फूल गए. जिला प्रशासन ने दावा किया है कि अनुदान राशि ट्रांसफर होने के पहले यह मामला सामने आ गया है. इसकी जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम का गठन कर दिया गया है. जांच के बाद ही लाभार्थियों को अनुदान राशि ट्रांसफर किया जाएगा.