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राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के चेयरमैन ने अलग-अलग विभाग के अधिकारियों के साथ की मीटिंग  

बच्चों के अधिकारों से सम्बन्धित कानूनों को लागू करने और विभिन्न योजनाओं का लिया जायज़ा
खबर खास, चंडीगढ़, 27 दिसंबर:
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग, नयी दिल्ली के चेयरमैन, प्रियांक कानूनगो ने पंजाब के अलग-अलग विभाग के अधिकारियों के साथ बच्चों के अधिकारों से सम्बन्धित कानूनों को लागू करने और अलग-अलग योजनाओं की समीक्षा के लिए मीटिंग की।
आज पंजाब भवन में मीटिंग के दौरान विशेष मुख्य सचिव, सामाजिक सुरक्षा और महिला एवं बाल विकास, मैंबर सचिव पंजाब राज्य कानूनी सेवा अथॉरिटी, सचिव गृह मामले और न्याय विभाग, विशेष सचिव पंजाब एड्ज़ कंट्रोल सोसायटी, सामाजिक न्याय, अधिकारिता और अल्पसंख्यक विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग, प्रशासनिक सुधार और लोग शिकायत विभाग, ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, स्थानीय निकाय विभाग, नेशनल हैल्थ मिशन, फूड एंड ड्रग्ज़ ऐडमिनिस्ट्रेशन, श्रम विभाग के अधिकारियों से बच्चों के विकास को प्रोत्साहित करने सम्बन्धी अलग-अलग योजनाओं का जायज़ा लिया।
उन्होंने कहा कि आयोग बाल अधिकारों को नुकसान और उल्लंघन से सम्बन्धित शिकायतें, बाल सुरक्षा और विकास हेतु बने कानूनों पर अमल न करना, नीति, दिशा-निर्देशों का पालन न करने सम्बन्धी शिकायतों के साथ-साथ ख़ुद मामले की पड़ताल करने हेतु सिविल कोर्ट के अधिकार रखता है। बच्चों से सम्बन्धित अलग- अलग कानूनों और विधान सभाओं को प्रभावशाली ढंग से लागू करना जैसे कि सैक्स अपराधों से बच्चों की सुरक्षा (पोक्सो) एक्ट, 2012, जुवेनाईल जस्टिस (बच्चों की देखभाल और सुरक्षा) एक्ट, 2015 और मुफ़्त एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (आर.टी.ई.) एक्ट, 2005 और बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना है। चेयरमैन ने कहा कि बाल अधिकारों के संरक्षण हेतु किसी भी कानून द्वारा या कानून के अधीन मौजूदा समय में लागू सुरक्षा की जांच और समीक्षा एवं इनके प्रभाव लागू किए जाएँ। इस सुरक्षा की कार्य शैली एवं सालाना और ऐसी अन्य अवधियों और, आयोग को रिपोर्ट भेजने के लिए कहा।
उन्होंने कहा कि बाल अधिकारों के उल्लंघन की पड़ताल करना और ऐसे मामलों में कार्यवाही की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि विशेष ध्यान और संरक्षण की ज़रूरत वाले बच्चों, जिनमें कमज़ोर स्थिति में रह रहे बच्चे, हाशीए और या लाभ के बिना बच्चे, कानूनी विवाद में उलझे बच्चे, किशोर, बिना परिवार के बच्चे और कैदियों के बच्चे शामिल हैं, से सम्बन्धित मामलों को देखना और उचित समाधान करने की ज़रूरत है। बाल अधिकारों और मौजूदा नीतियों, कार्यक्रमों और अन्य गतिविधियों की समय-समय पर समीक्षा करना और बच्चों के सर्वोच्च हित में इनको प्रभावशाली रूप से लागू करना ज़रूरी है।

इस मौके पर पंजाब राज्य बाल संरक्षण अधिकार आयोग के चेयरमैन कंवरदीप सिंह, सामाजिक सुरक्षा और महिला एवं बाल विकास विभाग के डायरैक्टर डॉ. सेना अग्रवाल, डिप्टी डायरैक्टर अमरजीत सिंह भुल्लर और राजविन्दर सिंह गिल विशेष रूप से उपस्थित थे।

 

 

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