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Punjab : तीनों संशोधित आपराधिक बिलों की समीक्षा हो ताकि न हो दुरुपयोग : हरसिमरत कौर

चंडीगढ़ : पूर्व केंद्रीय मंत्री और बठिंडा से सांसद हरसिमरत कौर बादल ने आज, बुधवार को तीन संशोधित आपराधिक विधयेकों की समीक्षा करने की मांग करते हुए कहा कि साथ ही यह सुनिश्चित करने के लिए जांच की जाए ताकि उनका दुरूपयोग न हो। उन्होंने दोषी के परिवार द्वारा दया याचिका दायर करने की अनुमति वाले क्लाज पर भी संशोधन की मांग की है।

हरसिमरत ने कहा कि अगर नया बिल पारित हुआ तो बंदी सिंह बलवंत सिंह राजोआणा के मानवाधिकारों का और ज्यादा उल्लंघन होगा। संसद में तीन संशोधित आपराधिक विधेयकों पर बहस में भाग लेते हुए हरसिमरत ने कहा, ‘हमें ध्यान रखना चाहिए कि हम चीन की तरह एक सत्तावादी राज्य न बनें और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि संविधान में निहित मानव जीवन और मूल्यों को उचित सम्मान दिया जाए’। उन्होंने कहा कि नागरिक अधिकार सबसे अहम है और इसे सुनिश्चित करने के लिए ख्याल रखा जाए कि हम पुलिस को बेलगाम शक्तियां देकर एक राज्य को पुलिस राज्य न बनाए।

इस तथ्य पर अफसोस जताते हुए कि तीन विधेयकों पर बहस के लिए केवल सत्तारूढ़ दल के सांसद और कुछ अन्य लोग ही संसद में मौजूद थे। बठिंडा सांसद ने कहा, ‘‘ हर किसी को अपने विचार व्यक्त करने की अनुमति दी जानी चाहिए’’। उन्होने उस तरीके पर भी कड़ा संज्ञान लिया जिसमें संशोधित विधेयक की धारा 113 ने गैरकानूनी गतिविधियां(रोकथाम) अधिनियम (यूपीए) की धारा 15 के तह मौजूदा परिभाषा को पूरी तरह से अपनाने के लिए आतंकवाद के अपराध की परिभाषा संशोधित किया था। उन्होने कहा कि यूपीए का पहले पंजाब में नौजवानों को गिरफ्तार करने और उन्हे जेल में डालने के लिए दुरूपयोग किया गया था।

उन्होंने कहा कि  कैसे नौजवान पहले भी और अब भी संसद में हुई घटना की भावनाओं में बहकर कार्रवाई करते हैं। उन्होने कहा, ‘हाल के मामले में नौजवान मणिपुर में बढ़ती बेरोजगारी और जातीय हिंसा जैसे मुददों से प्रभावित थे। इससे पहले भी उस दौर में जब पूर्व कांग्रेस मुख्यमंत्री बेअंत सिंह ने फर्जी मुठभेड़ों में  नौजवानों की एक पूरी पीढ़ी  को खत्म करने की निगरानी की थी तब भाई बलवंत सिंह राजोआण जैसे कुछ युवाओं ने विशेष कदम उठाए थे, जिसके लिए उन्हे 28 से 30 साल की अवधि के लिए जेल में रखा गया ’। उन्होने कहा कि सजा पूरी होने के बाद भी इतने लंबे समय तक कैद में रखना संविधान और कानूनी न्यायशास्त्र के खिलाफ होने के साथ साथ उनके मानवाधिकारों का भी उल्लंघन है।

सांसद ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा कि शिरोमणी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) द्वारा दायर की गई भाई राजोआणा की दया याचिका बारह सालों से लंबित है। उन्होने कहा कि यदि संशोधित विधेयक पारित हो गया तो यह याचिका निरर्थक हो जाएगी क्योंकि एक नए खंड में ऐसी याचिका अकेले परिवार के सदस्य द्वारा दायर करना अनिवार्य कर दिया गया है। उन्होने कहा  कि यदि किसी व्यक्ति के पास परिवार नही है तो वह इसके लिए आवेदन कैसे करेगा?। उन्होने इस धारा पर पुनर्विचार की मांग की है।

हरसिमरत ने कहा कि केंद्र सरकार ने 2019 में श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व पर उनकी रिहाई का मार्ग प्रशस्त  करने के लिए आठ बंदी सिंहों को रिहा करने के साथ-साथ राजोआणा की मौत की सजा को कम करने की अधिसूचना जारी की थी तो फिर उन्हे रिहा क्यों नही किया जा रहा है?