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सुप्रीम कोर्ट चंडीगढ़ मेयर चुनाव के रिटर्निंग ऑफिसर के स्पष्टीकरण पर 19 को सुनवाई करेगा

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट सोमवार को रिटर्निंग ऑफिसर अनिल मसीह द्वारा चंडीगढ़ मेयर चुनाव में मतपत्रों को विकृत किए जाने को लेकर दिए गए स्पष्टीकरण पर सुनवाई करेगा. शीर्ष अदालत की वेबसाइट में प्रकाशित वाद सूची के मुताबिक चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में शीर्ष न्यायालय इंडिया गठबंधन से मेयर पद के उम्मीदवार कुलदीप कुमार की याचिका पर सुनवाई करेगा. कुमार ने पीठासीन अधिकारी पर मतगणना के दौरान धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप लगाए.

इससे पहले शीर्ष न्यायालय ने अधिकारियों को 19 फरवरी को अदालत में अपने व्यवहार की व्यख्या करने के लिए प्रस्तुत होने को कहा था. पांच फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, सुनवाई के दौरान अदालत में वीडियो चलाया गया था. रिटर्निंग ऑफिसर को अपने आचरण को स्पष्ट करने के लिए लिस्टिंग की अगली तारीख पर इस अदालत के समक्ष उपस्थित रहना होगा जैसा कि वीडियो में दिखाई देता है.

सीजेआई चंद्रचूड़ ने आम पार्षद की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी द्वारा उपलब्ध कराए गए सीसीटीवी फुटेज को देखने के बाद कहा, यह लोकतंत्र का मजाक है. यह लोकतंत्र की हत्या है. क्या यह एक रिटर्निंग ऑफिसर का व्यवहार है, जो कैमरे की ओर देखकर बैलेट को विकृत कर रहे हैं. इससे यह स्पष्ट होता है कि यह शख्स बैलेट को विकृत कर रहा है. इस शख्स को दंडित किया जाना चाहिए.

वहीं, निगम की बैठक को 7 फरवरी के लिए टालते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि चुनाव संबंधित पूरा वीडियो, बैलेट पेपर, वीडियोग्राफी फुटेज पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल की हिरासत में जब्त कर लिया जाएगा. कोर्ट ने कहा, प्रथमदृष्टया, इस स्तर पर, हमारा मानना है कि चुनावी प्रक्रिया की सुचिता और पवित्रता की रक्षा के लिए एक उचित अंतरिम आदेश की आवश्यकता थी, जिसे पारित करने में उच्च न्यायालय विफल रहा है.

वहीं, आप और कांग्रेस के संयुक्त उम्मीदवार कुलदीप कुमार ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा 30 जनवरी को मेयर पद के लिए हुए चुनावी नतीजों पर रोक लगाए जाने के बाद शीर्ष न्यायालय में याचिका दाखिल की है. उच्च न्यायालय के समक्ष अपनी याचिका में कुलदीप कुमार ने अभ्यास और नियमों को पूरी तरह से छोडऩे का आरोप लगाते हुए कहा कि पीठासीन अधिकारी ने पार्टियों के उम्मीदवारों को वोटों की गिनती की निगरानी करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया. उन्होंने उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की देखरेख में स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से नए चुनाव की प्रार्थना की.