Friday , July 12 2024

पंजाब सरकार जल्द करेगी 300 वैटरनरी अधिकारियों की भर्ती: खुडि्डयां

खबर, खास, चंडीगढ़:

राज्य में पशु धन के स्वास्थ्य संभाल नैटवर्क को और मज़बूत करने के उदेश्य से मुख्य मंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार द्वारा 300 वैटरनरी अधिकारियों की भर्ती की जाएगी। यह जानकारी पंजाब के पशु पालन, डेयरी विकास और मछली पालन मंत्री गुरमीत सिंह खुडि्डयां ने दी। यहाँ अपने दफ़्तर में विभाग द्वारा चलाए जा रहे अलग-अलग प्रोजैक्टों का जायज़ा लेते हुए कैबिनेट मंत्री ने बताया कि पंजाब लोक सेवा कमिश्न ( पी.पी.एस.सी.) ने वैटरनरी अधिकारियों के पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी है। बता दे कि मुख्य मंत्री स. भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने पिछले दो सालों में 326 वैटरनरी अधिकारियों और 536 वैटरनरी इंस्पेक्टरों की भर्ती की है।

उन्होंने बताया कि पशु अस्पतालों में दवाएँ और उपकरणों की खरीद के लिए 93 करोड़ रुपए की कार्य योजना भारत सरकार को सौंपी गई है। उन्होंने विभाग के अधिकारियों को मूंहखुर और गलघोटू ( हैमोरैजिक सैपटीसीमिया) विरुद्ध चलाई जा रही टीकाकरण अभियान को 30 जून, 2024 तक पूरा करने के भी निर्देश दिए। कैबिनेट मंत्री को इस अभियान को निर्धारित समय में पूरा करने का विश्वास दिलाते हुए पशु पालन विभाग के डायरैक्टर डा. रंजीव बाली ने बताया कि इस अभियान के अंतर्गत अब तक लगभग 78 प्रतिशत और 75 प्रतिशत पशुओं को क्रमअनुसार मूंहखुर और गलघोटू से बचाव के लिए वैक्सीन की डोज़ लगाई गई है।

खुडि्डयां ने बताया कि किसानों को डेयरी फार्मिंग पेशे को अपनाने के लिए उत्साहित करने के लिए विभाग द्वारा दुधारू पशुओं की खरीद पर जनरल वर्ग को 25 प्रतिशत और अनुसूचित जातियों के लाभपात्रियों को 33 प्रतिशत वित्तीय सहायता दी जाती है। इस योजना के अंतर्गत प्रति पशु निर्धारित रेट 70,000 रुपए है। विभाग ने 2023- 24 दौरान 1089 दुधारू पशुओं के लिए लगभग 2 करोड़ रुपए वित्तीय सहायता के तौर पर दिए है।

उन्होंने बताया कि विभाग की तरफ से राष्ट्रीय पशुधन योजना के अंतर्गत पिछले पाँच सप्ताह दौरान पशु पालकों को 7200 दुधारू पशुओं के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। इस योजना के अंतर्गत छोटे/ मध्यम दूध उत्पादकों को एक से पाँच दुधारू पशुओं के बीमे के लिए वित्तीय सहायता दी जा रही है। पशु पालन मंत्री ने बताया कि जनरल वर्ग को 50 प्रतिशत और अनुसूचित जाति के साथ सम्बन्धित दूध उत्पादकों को 70 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता दी जा रही है।