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पाकिस्तान की वो वकील, जिसे ग्लोबल पहचान मिली, दिन में मांगती थीं भीख, रात में करती थीं पढ़ाई

पड़ोसी देश पाकिस्तान (Pakistan) में सामान्य नागरिकों को शिक्षा मुहैया कराना ही आसान काम नहीं है. ऐसे में इन दिनों यहां की रहने वाली निशा राव (Nisha Rao) को अपनी असाधारण उपलब्धि के लिए पूरी दुनिया में सुर्खियां मिल रही हैं. दरअसल निशा राव पाकिस्तान में नाम बन चुकी हैं संघर्ष और दृढ़ इच्छाशक्ति का. वे उस तबके से आती हैं, जिन्हें आसानी से समाज में न तो स्वीकार्यता मिलती है, न ही उन्हें दूसरों की तरह अवसर दिए जाते हैं. इन सबके बीच भी निशा ने न सिर्फ अपनी काबिलियत साबित की बल्कि समाज के सामने एक मिसाल भी रखी.

निशा राव ने खुद को समाज में ट्रांसजेंडर्स ( Transgenders in Pakistan) की स्थिति को देखने के बाद 16 साल की उम्र में ही घर छोड़ दिया और अपनी पहचान बनाने का संघर्ष शुरू कर दिया. उनके सामने कई मुश्किलें आईं, लेकिन उन्होंने हौसले के दम पर सब पार करते हुए पाकिस्तान की पहली ट्रांसजेंडर वकील बनने का सपना सच कर दिखाया.

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निशा राव लाहौर में पैदा हुईं. ट्रांसजेंडर होने की वजह से न तो परिवार और न ही समाज ने उन्हें स्वीकार किया. उन्हें इस बात को लेकर ताने मिलने लगे, जिसके बाद उन्होंने छोटी सी उम्र में घर छोड़ दिया. कराची आने के बाद उन्हें अपने सपने सच करने के लिए बुरे वक्त से गुजरना पड़ा. उनके समुदाय ने उन्हें बताया कि पेट भरने के लिए या तो उन्हें भीख मांगनी होगी या फिर सेक्स वर्कर के तौर पर काम करना होगा. निशा ने भीख मांगना बेहतर समझा. इस दौरान उनकी हिम्मत नहीं टूटी. वे दिन पर सिग्नल पर भीख मांगती थीं और उसमें से पैसे बचाकर पढ़ाई शुरू कर दी. दिन में भीख मांगना और रात में पढ़ना, उनकी दिनचर्या बन गया था.

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