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बड़ी खबर: सरकारी से प्राइवेट हो सकते है ये 4 बैंक, आज होगी बैठक, सीधा ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा असर!

सरकारी बैंकों के प्राइवेटाइजेशन को लेकर बुधवार शाम को होने वाली बैठक में कई कई मुद्दों पर चर्चा हो सकती है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, इंडियन ओवरसीज बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ इंडिया के  प्राइवेटाइजेशन को लेकर फैसला हो सकता है.

आपको बता दें कि 1 फरवरी को पेश हुए बजट में बैंकों के निजीकरण का ऐलान किया गया था. वित्त वर्ष 2021-22 में दो सरकारी बैंकों के प्राइवेटाइजेशन का प्लान है. बताया जा रहा है कि  प्राइवेटाइजेशन की लिस्ट में बैंक ऑफ महाराष्ट्र, इंडियन ओवरसीज बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक के नाम की चर्चा है. हालांकि, अभी तक इसको लेकर कोई भी फैसला नहीं हुआ. वीएम पोर्टफोलियो के रिसर्च हेड विवेक मित्तल ने TV9 हिंदी को बताया कि सरकार देश में सिर्फ 5 बैंक रखना चाहती है.

सीधा ग्राहकों पर पड़ेगा असर

एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकारी बैंकों को प्राइवेट करने से ग्राहकों पर कोई खास असर नहीं होगा. बैंक की सर्विसेज पहले की तरह जारी रहती है. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि इससे पहले सरकार आईडीबीआई बैंक को प्राइवेट कर चुकी है. ये बैंक लंबे समय से आर्थिक संकट से गुजर रहा था. बैंक को संकट से उबारने के लिए साल 2019 सितंबर में भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) और सरकार ने बैंक में 9,300 करोड़ रुपये का निवेश किया था.

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आईडीबीआई एक सरकारी बैंक था, जो 1964 में देश में बना था. LIC ने IDBI में 21000 करोड़ रुपये का निवेश करके 51 फीसदी हिस्सेदारी ख़रीदी थी.

इसके बाद LIC और सरकार ने मिलकर 9300 करोड़ रुपये IDBI बैंक को दिये थे. इसमें एलआईसी की हिस्सेदारी 4,743 करोड़ रुपये थी.

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