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UPI और बार कोड के जरिए राम मंदिर के लिए चंदा लेना बंद किया, जानिए पूरा मामला

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की तैयारियां तेजी से चल रही हैं. अयोध्या राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इसके लिए चंदा अभियान शुरू किया है. पूरे देश में लोग समर्पण राशि या चंदा दे रहे हैं. लेकिन इसमें कुछ फर्जीवाड़े की भी खबरें आ रही हैं. ऐसी खबरें हैं कि जालसाज लोग फर्जी पर्ची छपवा कर और फर्जी यूपीआई कोड के नाम पर चंदा वसूल रहे हैं और फर्जीवाड़ा कर रहे हैं. इससे बचने के लिए राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट ने साफ कर दिया है कि UPI या बारकोड के जरिये चंदा नहीं लिया जा रहा है. अगर ऐसा कोई करता है तो यह गलत है और इनके खिलाफ शिकायत की जानी चाहिए.

ट्रस्ट को यह फैसला इसलिए लेना पड़ा क्योंकि लोगों ने शिकायत की थी कि वे चंदा देना चाह रहे हैं लेकिन इसमें फर्जीवाड़े की आशंका को देखते हुए उन्हें हिचक हो रही है. ऐसी भी कई खबरें आई हैं जिसमें पता चला है कि फर्जीवाड़ा करने वाले लोग नकली पर्ची छपवा कर चंदा वसूल रहे हैं. इससे मंदिर निर्माण के नाम पर गलत हाथों में पैसा जा रहा है, साथ ही ट्रस्ट की छवि भी धूमिल हो रही है. कई जगह यूपीआई से भी ठगी का मामला सामने आया है.

फर्जीवाड़े की वारदात बढ़ी

एक रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक 12 फर्जी यूपीआई कोड बनाए गए हैं जिसके जरिये चंदा मांगा जा रहा है. राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट ने इसे देखते हुए लोगों को आगाह किया है और कहा है कि यूपीआई या बारकोड से चंदा नहीं लिया जा रहा है. इसके जरिये अगर चंदा मांग रहा है तो इससे बचने और पुलिस में शिकायत करने की सलाह दी गई है. दरअसल, ठगी करने वाले लोग असली यूपीआई से मिलते-जुलते नाम वाले कुछ यूपीआई बनाए हैं और लोगों से उस पर पैसे ट्रांसफर करा रहे हैं.

पूरे देश में 12 फर्जी यूपीआई की जानकारी मिलने के बाद साइबर सेल ने कड़ी कार्रवाई की है और इन फर्जी अकाउंट को बंद कराया है. ठगी करने वाले लोग असली यूपीआई कोड में एक दो वर्ड बदल देते हैं जिससे लोगों को इसकी जल्दी जानकारी नहीं हो पाती. कई लोग हैं जो ऑनलाइन माध्यम से यूपीआई के जरिये चंदा दे रहे हैं या देना चाह रहे हैं. इनका पैसा गलत हाथों में जा रहा है. इसे देखते हुए ट्रस्ट ने इस पर रोक लगा दी है.

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क्या कहा चंपत राय ने

एक हिंदी अखबार को दिए इंटरव्यू में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत ने बताया कि हमने UPI और बारकोड के जरिए समर्पण निधि या चंदा लेना बंद कर दिया है. ये बिलकुल भी विश्वसनीय माध्यम नहीं है. हमारी टीम ने बताया है कि इसमें गड़बड़ संभव है, हमें खुद बैंकों ने इस बारे में जानकारी दी है. हम सिर्फ तीन बैंक अकाउंट्स में चंदा ले रहे हैं जो कि स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक और बैंक ऑफ़ बड़ौदा के अकाउंट्स में दिया जा सकता है. उन्होंने बताया कि देश भर से समर्पण राशि इकठ्ठा करने के नाम पर फर्जीवाड़े की ख़बरें आ रहीं हैं. चंपत राय के मुताबिक देश के कई राज्यों में FIR दर्ज हुई हैं. ट्रस्ट के पास मौजूद जानकारी के मुताबिक ऐसी 8 से 10 FIR अभी तक दर्ज हुई हैं.

यूपीआई से फर्जीवाड़ा

केवल चंदा ही नहीं बल्कि और भी कई तरह के फर्जीवाड़े में यूपीआई और बारकोड का गलत इस्तेमाल बढ़ा है. कोरोना काल में इसमें ज्यादा तेजी देखी गई. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ऐसी कई शिकयतें मिली हैं जिसके बारे में इंटरपोल ने भी आगाह किया है. कम दिनों में जमा राशि दोगुनी करने के नाम पर लोगों को ठगी का शिकार बनाया जा रहा है. लोगों को कोरोना टीका के नाम पर झांसे में लिया जा रहा है और उनकी जानकारियां चुराई जा रही हैं. ऐसी शिकायतें हैं कि कोरोना टीका दिलाने के नाम पर पैसे मांगे गए और अकाउंट डिटेल देते ही खाता खाली हो गया.

सावधान रहें, सुरक्षित रहें

ठगी करने वाले शातिर लोग लोगों को मैसेज भेजकर गलत लिंक भेज रहे हैं. लिंक पर क्लिक करते ही बैंक की सारी जानकारी उनके पास चली जाती है और फिर अकाउंट को हैक कर लिया जाता है. बैंकों ने अपने कस्टमर्स को आगाह किया है कि इस तरह के लिंक पर क्लिक न किया जाए. साइबर सेल की तरफ से यह भी बताया गया है कि जब तक आप निश्चिंत न हो जाएं तब तक किसी क्यूआर कोड या बारकोड को स्कैन न करें. यह भी किसी जालसाजी का बड़ा हिस्सा हो सकता है और आपका पैसा मारा जा सकता है. ऑनलाइन ठगी के मामलों को देखते हुए बैंक, पुलिस और साइबर सेल ने समय-समय पर कई एहतियात जारी किए हैं लोगों को आगाह किया है.

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