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कुटनीति : क्वाड देशों के साथ आया अमेरिका अब चीन की हालत लाचार

भारत-चीन के बीच चल रहे विवाद के दौरान कुटनीतिक स्तर पर भारत मजबूत होता जा रहा है। दुनियां के देशों को जोरदार समर्थन भारत के पक्ष में होता जा रहा है। चीन क्वाड को लेकर कितना भी असहज हो लेकिन अमेरिका का नया नेतृत्व इस मोर्चेबंदी को आगे बढ़ाने के पक्ष में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन के बीच सोमवार रात को बातचीत हुई। बातचीत के बाद जल्द ही क्वाड की बैठक को लेकर भी संभावना जताई जा रही है। बातचीत पर अमेरिका की ओर से जारी बयान में क्वाड का खास जिक्र किया गया है। अमेरिका क्वाड के पक्ष में है। भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान का चार देशों का समूह दक्षिण चीन सागर व हिंद प्रशांत छेत्र में नियम आधारित व्यवस्था की वकालत करता रहा है। क्वाड देशों के चलते चीन का समीकरण गड़बड़ा गया है। चीन क्वाड को अपने खिलाफ मोर्चे के रूप में देखता है। पिछले दिनों रूस ने भी इस गठजोड़ को लेकर सवाल उठाए थे। भारत स्पष्ट कहता रहा है कि क्वाड को किसी देश के खिलाफ मोर्चेबंदी के रूप में नहीं देखना चाहिए।

सूत्रों ने कहा कि अमेरिका के नए राष्ट्रपति जो बाइडन इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की चार बड़ी लोकतांत्रिक ताकतों को एकजुट करना चाहते हैं। अमेरिका क्वॉड के आधार पर अपनी इंडो-पैसिफिक नीति निर्धारित करना चाहता है। ऑनलाइन मीटिंग जल्द हो सकती है। गौरतलब है कि इस इलाके में चीन की बढ़ती सैन्य मौजूदगी को देखते हुए अमेरिका क्वाड देशों के साथ रणनीतिक सहयोग को विस्तार देना चाहता है। क्वॉड फ्रेमवर्क के चारों देशों के विदेश मंत्रियों ने 2019 में न्यूयॉर्क में बैठक की थी और फिर कोरोना वायरस की महामारी के बीच टोक्यो में पिछले साल मुलाकात हुई थी।

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अक्तूबर में हुई बैठक में अमेरिका के तत्कालीन विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो चीन पर जमकर बरसे थे। चीन क्वाड देषों के संगठन को नहीं चाहता है। माइक पाॅम्पियो ने चीन पर आरोप लगाया था कि वह अपने पड़ोसी दक्षिण एशियाई देशों पर दबदबा कायम करने के लिए आर्थिक शक्ति का इस्तेमाल कर रहा है। अमेरिका में नए प्रशासन के बाद चीन नीति को लेकर दुनिया की निगाह टिकी हुई है। खासतौर पर भारत का हित भी इससे जुड़ा हुआ है। क्वाड के देश इस इलाके में संपर्क बढ़ाने को लेकर काफी संजीदा है।

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