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नहीं टूटेगा INS विराट, डिस्मैन्टल करने पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने आईएनएस विराट को तोड़ने पर रोक लगाते हुए फिलहाल यथास्थिति बरकरार रखने को कहा है। इसके साथ ही कोर्ट ने खरीदने वाले को नोटिस भी जारी किया है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा गया है कि एक ग्रुप भविष्य के लिए इसे संरक्षित करना चाहता है और खरीदार को 100 करोड़ रुपये की पेशकश की गई है। खरीदार ने इसे कबाड़ बनाने के लिए खरीदा है।

 

 


हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह जहाज 10 साल से ज्यादा तक नहीं रह पाएगा। केंद्रीय जहाजरानी मंत्री मनसुख मंडाविया ने युद्धपोत के लिए बोली लगाने के लिए एक कार्यक्रम में कहा कि सरकार संग्रहालय परियोजना पर 400-500 करोड़ रुपये खर्च करने को तैयार है, लेकिन विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि जहाज 10 साल से अधिक नहीं चलेगा।

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एनविटेक मरीन कंसल्टेंट्स लिमिटेड नाम की कंपनी ने 100 करोड़ रुपए का भुगतान कर उसे बतौर संग्रहालय संरक्षित करने की मांग की थी। आईएनएस विराट को भावनगर के श्रीराम ग्रुप ने खरीदा था, उसे कबाड़ के तौर पर तोड़ा जा रहा है। साल 2007 में भारतीय नौसेना के इस विमानवाहक युद्धपोत ‘आईएनएस विराट’ को रिटायर कर दिया गया था। करीब 24 हजार टन वजनी विराट की लंबाई करीब 740 फीट और चौड़ाई करीब 160 फीट थी। उस पर डेढ़ हजार (1500) नौसैनिक तैनात होते थे। विराट पर एक समय में तीन महीने का राशन रखा रहता है, क्योंकि विराट एक बार समंदर में निकलता था तो 90 दिन तक बंदरगाह में वापस नहीं लौटता था। उस पर तैनात सी-हैरियर लड़ाकू विमान और सीकिंग हेलीकॉप्टर विराट की ताकत को कई गुना बढ़ा देते थे। हालांकि ना तो करगिल युद्ध और ना ही श्रीलंका के पीसकीपिंग मिशन में विराट का इस्तेमाल किया गया लेकिन उसने अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई।

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