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मात्र 6 क्लर्कों की भर्ती में हुई 1 करोड़ की डील, कई अभ्यर्थियों की कॉपी परीक्षा नियंत्रक ने लिखी

रक्षा मंत्रालय के गुलाम छह क्लकों के भर्ती घोटाले में CBI ने कर्नल को क्लीन चिट दे दी है. इम्तिहान बोर्ड में शामिल दो अन्य ऑफिसरों को भी राहत दी है. जाँच में खुलासा हुआ कि छह में से तीन पदों पर सगे-संबंधियों की भर्ती की गई. इम्तिहान बोर्ड के मुख्य पीठासीन ऑफिसर ही सबसे बड़े खलनायक निकले, जिन्होंने अपने हाथों से कॉपियों को न केवल सही किया बल्कि नंबर भी बढ़ा दिए. घोटाले में करीब एक करोड़ रुपए की डील हुई है.

छह क्लर्कों के भर्ती घोटाले को लेकर CBI ने क्लास वन ऑफिसर डिप्टी कंट्रोलर और इम्तिहान बोर्ड के पीठासीन ऑफिसर संतोष कुमार तिवारी, एसएसओ सुनील कुमार और मोहम्मद आलिम, ज्वाइंट कंट्रोलर कर्नल एके गांधी के विरूद्ध जाँच प्रारम्भ की थी. जाँच में खुलासा हुआ कि डीजीक्यूए में लोअर डिविजन क्लर्क के चार पदों के लिए एडवरटाईजमेंट निकाले गए. बाद में इन पदों को बढ़ाकर छह कर दिया गया.

जिनमें से 3 सामान्य श्रेणी, 1 ओबीसी, 1 एससी-एसटी और दिव्यांग श्रेणी के लिए आरक्षित था. मात्र 6 पदों के लिए 4181 लोगों ने आवेदन किया, जिनमें से 952 को लिखित इम्तिहान के लिए चुना गया. इम्तिहान के लिए एक कमेटी गठित की गई. 26 जून को आयोजित लिखित इम्तिहान 517 अभ्यर्थियों ने दी. परीक्षकों ने  कॉपियां जमाकर बिना सील किए ही डाक्टर संतोष कुमार तिवारी को सौंप दीं.

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अकेले ही जाँच दीं कॉपियां-

जांच में खुलासा हुआ कि पीठासीन ऑफिसर ने कमरे में कॉपियों का मूल्याकंन किया और वैज्ञानिक नेहा अग्रवाल को कोई सूचना नहीं दी. पाए हुए सभी छह अभ्यर्थियों के उन्होंने 3-11 नवंबर तक बढ़ाए. इतना ही नहीं, दिव्यांग कोटे से भर्ती अर्पित सिंह ने दिव्यांग सर्टिफिकेट ही जमा नहीं किया.

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