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ड्रैगन ने LAC से क्यों वापस बुलाए 10 हजार जवान? जानिए, इसके पीछे की पूरी वजह

हॉन्ग-कॉन्ग स्थित एक अंग्रेजी अखबार ने चीनी सूत्रों के हवाले से दावा किया कि चाइना ने ‘भारत के साथ विवादित सीमा’ से 10 हजार सैनिकों को वापस बुला लिया है, क्योंकि ड्रैगन को लगता है कि ठंड के मौसम में आमना-सामना होने की आशंका काफी कम है. अखबार के अनुसार, सभी सैनिकों को सैन्य वाहनों से वापस बुलाया गया है, ताकि भारतीय पक्ष देख सके और वैरिफाई कर सके. दक्षिण चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट की मानें तो झिंजियांग और तिब्बत सैन्य क्षेत्रों की यूनिट्स से अस्थायी रूप से सैनिकों को यहां तैनात किया गया था. वहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा योजनाकारों के अनुसार, इंडियन आर्मी ऐसे समय तक अलर्ट पर रहेगी, जब तक कि पीएलए पूर्वी लद्दाख की एलएसी पर यथास्थिति बहाल नहीं करती. उन्होंने आमने-सामने वाली जगहों से भारतीय सैनिकों की वापसी की संभावनाओं को तब तक के लिए खारिज कर दिया, जब तक डिस-एंगेजमेंट और डी-एस्केलेशन नहीं हो जाता.

गौर करने वाली बात यह है कि पीएलए काराकोरम दर्रे से 94 किलोमीटर दूर जैदुल्ला या शहीदुल्ला गैरिसन में वार्षिक एक्सरसाइज करती है. यह दर्रा सम्पत्ति बेग ओल्डी से कुछ ही दूरी पर है. 19वीं शताब्दी में, डोगरा जनरल जोरावर सिंह ने रणनीतिक रूप से स्थित इस कस्बे तक के सभी क्षेत्रों पर अतिक्रमण कर लिया था. यह सैंशिली बैरक के रूप में जाना जाता है और लद्दाख और तारिम बेसिन के बीच कारवां मार्ग पर स्थित है. जैदुल्ला पर वर्ष 2018 को छोड़कर हर वर्ष पीएलए ट्रेनिंग अभ्यास करती रहती है.

साल 2020 में, एक डिवीजन प्लस पीएलए सैनिकों ने मार्च-अक्टूबर 2020 तक 100-150 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में एक्सरसाइज किया, जिसमें छह मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री डिवीजन और चार मोटराइज्ड डिवीजन शामिल थे. इस दौरान, इंडियन आर्मी के साथ चीनी सेना का आमना-सामना भी जारी था. हालांकि, अभी तक यह साफ नहीं हो सका है कि वे वापस चले गए हैं यानहीं. इसी तरह की ट्रेनिंग अभ्यास चुम्बी घाटी में सिक्किम सीमा पर फारी जोंग में भी होती रही है.

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हालांकि, यह बताने के लिए सबूत हैं कि पीएलए के जवान अतिक्रमण किए गए अक्साई चिन में इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने के बाद पिछले महीने वापस चले गए हैं. 320 से अधिक वाहन वापस चले गए और कुछ 40-45 अस्थायी शेल्टर्स को इंफ्रास्ट्रक्चर का कार्य पूरा होने के बाद निकाल लिया गया.

चीनी न्यूज रिपोर्ट में बोला गया है कि सेंट्रल मिलिट्री कमिशन यह तय मान कर चल रहा है कि दोनों पक्षों के लिए हिमालय में इस तरह के बहुत ठंडे मौसम में लड़ना असंभव है और इसलिए सैनिकों को आराम करने के लिए वापस बनाए गए उनके बैरकों में भेज दिया गया है. अखबार ने एक सेवानिवृत्त भारतीय राजनयिक के हवाले से यह भी बोला है कि कथित चीनी कदम हिंदुस्तान को एक समान प्रतिक्रिया पर विचार करने के लिए प्रेरित कर सकता है, लेकिन इंडियन आर्मी को ऐसे माइंड गेम्स से सावधान रहना चाहिए.

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