Breaking News

अजब-गजब : कानपुर का डॉग फूड बना इन देशों के लोगों का फास्ट फूड, जानिए कैसे करते है इस्तेमाल?

जो व्यंजन कुत्तों के लिए तैयार किए गए थे, वे कुछ देश ों में इंसानों को पसंद आने लगे. इस हद तक कि कानपुर इन व्यंजनों का करोड़ों US डॉलर का निर्यात कर रहा है. दिलचस्प यह कि दुनिया के कुछ देश इन व्यंजनों को कुत्तों के लिए खरीद रहे हैं तो कुछ इंसानों के लिए.

कानपुर का लेदर हब बचे-खुचे चमड़े से इन व्यंजनों का उत्पादन कर रहा है. इनमें भैंस के कान के चिप्स और फेफड़े के च्युंगम शामिल हैं. यह डॉग फूड है, जिसकी यूरोप और अमेरिका में पालतू मांसाहारी पशुओं के लिए अच्छी मांग है लेकिन चीन, हांगकांग और उससे सटे कुछ राष्ट्रों में लोग इसे फास्ट फूड के रूप में जमकर खाते हैं.

डॉग फूड का मार्केट कानपुर में अच्छा खासा है. यहां की टेनरियों में 95 प्रतिशत बफैलो लेदर यानी भैंस के चमड़े का इस्तेमाल होता है, इसलिए यहां उसके दूसरे अंगों से जुड़े दर्जनों ऑटोमेटिक प्लांट हैं. करीब 100 करोड़ रुपए का कुत्तों का भोजन बीस से अधिक राष्ट्रों में निर्यात होता है. हिंदुस्तान में दिल्ली, मुम्बई, बेंगलुरु में इसकी खासी मांग है.

ड्राई फेफड़े और कुरकुरे कानों के चिप्स 

डॉग फूड बनाने वाले जाजमऊ के युवा उद्यमी मोहम्मद अली ने बताया कि इसमें दो कैटेगरी हैं- एक चबाने वाली और दूसरी खाने वाली. खाने में सबसे अधिक हड्डियां और कान के चिप्स चलते हैं, जबकि फेफड़ों को कुत्ते ब़ड़े शौक से चबाते हैं. कानों को स्पेशल ड्रम में तैयार किया जाता है. सफाई के बाद हाइड्रोजन-पर-आक्साइड से प्रोसेस किया जाता है. फेफड़ों का इस्तेमाल मछलीदाने में भी किया जाता है. इन्हें सुखाकर पैक किया जाता है. प्रेस्ड बोन्स, नॉटेड बोन्स, रंगीन नॉटेड बोन्स, हाइड्स चिप्स और मंची स्पायरल की क्वालिटी कानपुर की बहुत ज्यादा अच्छी है.

Loading...

चीन में इंसानी इस्तेमाल से महंगा हुआ 

ये व्यंजन कुत्तों को बहुत प्रिय हैं लेकिन इसका स्वाद इंसानों को भी लग गया है. भारत, यूरोप और अमेरिका में तो इंसान नहीं खाते हैं लेकिन चाइना में इसे खूब खाया जाता है. बंथर के निर्यातक मोहम्मद शारिक ने बताया कि चाइना में ये उत्पाद बहुत ज्यादा महंगे बिक रहे हैं. वे कान और हड्डियों का इस्तेमाल सूप में करते हैं. फेफड़ों को फास्ट फूड के रूप में खाते हैं. उन्होंने बताया कि आयात करने के साथ-साथ चाइनीज ये उत्पाद अपने देश में भी बनाने लगे हैं. कोविड-19 के कारण बिजनेस प्रभावित हुआ है. जाजमऊ में लगातार बंदी का प्रभाव भी पड़ा है. कान, फेफड़े, हड्डियों के बिजनेस का 30 प्रतिशत मार्केट बांग्लादेश और पाक ने छीन लिया है.

ये हैं रेट 

कान 15 रुपए जोड़ा  (निर्यात में 35 रुपए जोड़ा)
लंग्स 60 रुपए किलो (निर्यात में 150 रुपए किलो)
बोन 150 रुपए किलो (निर्यात में 350 रुपए किलो)

error: Content is protected !!
%d bloggers like this:
http://newsindialive.in/ Digital marketting agency/