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पत्नी ने तंत्र साधना के लिए की पिता-पुत्र की हत्या, जाने कैसे हुआ खुलासा

कौशाम्बी के मंझनपुर के चायल कस्बे में शुक्रवार को हुई पिता-पुत्र की हत्या का खुलासा पुलिस ने दूसरे दिन ही कर दिया। पुलिस ने बताया कि मृतक की पत्नी ने ही तंत्र साधना के लिए अपनी तांत्रिक बहन, बहनोई और उनके बेटे के साथ मिलकर शौहर और अपने पुत्र की हत्या कर दी । शनिवार को पुलिस ने चारों आरोपियों को पिपरी के तेवारा मोड़ से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

पिपरी के चायल कस्बे में शुक्रवार की सुबह नौसे उर्फ वकील अहमद और उसके चार साल के बेटे अनवर की हत्या कर दी गई थी। दोनों की खून में सनी लाश घर के एक कमरे में रजाई से ढंकी मिली थी। नौसे के पेट में चाकू गोदकर आंत निकाल ली गई थी, जबकि बेटे अनवर का गला रेतने का प्रयास किया गया था।

शनिवार को एसपी अभिनंदन ने पत्रकार वार्ता में बताया कि गुलनाज ने ही शौहर नौसे और बेटे अनवर की हत्या अपनी बहन नूरी व बहनोई सफदर अली उर्फ बब्लू और उसके बेटे अनस निवासी शाहपुर थाना हथिगवां जनपद फतेहपुर के साथ मिलकर की। हत्या के पीछे गुलनाज का सिर्फ ये मकसद था कि वह बहनोई के साथ मिलकर तंत्र साधना कर रही थी। पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है। आरोपियों के पास से पुलिस को एक आला कत्ल चाकू भी बरामद हुआ है।

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पहले बेटे की बलि दी फिर जिंदा करने के लिए शौहर का किया कत्ल
मृतक की पत्नी गुलनाज ने पुलिस को बताया कि उसकी बहन नूरी और बहनोई ने गरीबी का हवाला देते हुए तंत्र विद्या के माध्यम से रातोंरात अमीर बनाने का सपना दिखाया था। इसके लिए वह अक्सर उसके घर आया करते थे। घटना वाली रात भी गुलनाज का बहनोई सफदर अली उर्फ बब्लू अपनी पत्नी नूरी और बेटे अनस के साथ आया था। तंत्र-क्रिया करने से पहले बहनोई सफदर के कहने पर गुलनाज अपनी दोनों बेटियों को जेठानी शकीना के घर छोड़ आई थी।

रात आठ बजे के बाद घर मे तंत्र क्रिया शुरू हुई। इस दौरान घर में गड्ढा खोदकर टोटका किया और फिर सफदर के कहने पर गुलनाज ने बेटे अनवर की गला दबा कर बलि दे दी। बेटे की बलि देने के बाद तांत्रिक बब्लू ने उसको जिंदा करने के लिए नौसे की आंत निकालने का हवाला दिया। इसके बाद सभी ने मिलकर पहले मृतक नौसे को बेहोश किया और फिर चाकू से नौसे की आंत निकाल ली।

गुलनाज ने बताया कि इसके बाद बहन-बहनोई ये हवाला देते हुए घर मे उसको अकेला छोड़कर चले गए कि सुबह होने से पहले उसका बेटा और शौहर दोनों जिंदा हो जाएंगे और फिर हमेशा के लिए उसकी गरीबी दूर हो जाएगी। बहन-बहनोई के जाने के बाद गुलनाज परेशान हो उठी। जिगर के टुकड़े की लाश और पति को तड़पता हुआ देख वह चीखने चिल्लाने लगी। रात में ही वह पड़ोसियों के घर जाकर मदद के लिए दरवाजा भी पीटने लगी। लेकिन मदद के लिए कोई भी आगे नहीं आया।

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