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नगरोटा में फिर सुरक्षाबलों ने पाकिस्तान के इरादे को पहचाना, जाने कैसे

जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर नगरोटा में मारे गए जैश-ए-मोहम्मद के चारों दहशतगर्दों को शकरगढ़ में जैश के ट्रेनिंग कैंप में आत्मघाती हमले की ट्रेनिंग दी गई थी। सूत्रों के अनुसार, इन्हें उपलब्ध विस्फोटकों का इस्तेमाल करके कश्मीर घाटी में ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाने की भी ट्रेनिंग दी गई।

सूत्रों के अनुसार, पाक में हैंडलर मौलाना मसूद अजहर के भाई अब्दुल रउफ असगर का इनकी ट्रेनिंग में प्रमुख हाथ था। उसने भारतीय सीमा के पास पाकिस्तान के शकरगढ़ कैंप से चार जिहादियों का चयन किया था। हमले की योजना बनाने के लिए एक अन्य आतंकवादी काजी तरार को भी असगर के साथ सौंपा गया था।

आतंकियों के सभी हथियार पाकिस्तान में बने हुए, सबके लिए तय किए थे गए समय
नगरोटा में जब सुरक्षाबलों ने ट्रक को रोका, तो इसमें छिपे चारों आतंकियों ने अल्लाह हू अकबर, इस्लाम जिंदाबाद, पाकिस्तान जिंदाबाद और जैश जिंदाबाद के नारे लगाने शुरू कर दिए। सुरक्षाबलों ने इन्हें सरेंडर करने को कहा, मगर यह साफ था कि वे भारतीय सरजमीं पर जान देने के इरादे से ही आए थे।

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मारे जाने के बाद इनके पास से 11 एके-47 राइफल, 23 मैग्जीन, 29 ग्रेनेड और 10 अंडर बैरेल ग्रेनेड लॉन्चर मिले। सभी के सभी हथियार पाकिस्तान में बने हुए थे। इनके पास से जीपीएस प्रणाली और कैसियो की घड़ियां भी मिलीं, जिसमें सभी आतंकियों के लिए एक समय तय किया गया था।

फरार ट्रक चालक का तीसरे दिन भी सुराग नहीं
जैश आतंकियों को ट्रक में ले जाने वाले चालक का तीसरे दिन भी कोई पता नहीं चल पाया है। हालांकि, पुलिस और सुरक्षाबलों ने तीसरे दिन भी जंगलों की खाक छानी। अब कयास लगाए जा रहे हैं कि चालक जंगल के रास्तों से होकर रिहायशी इलाके में पहुंच गया है।

पुलिस ने फिलहाल जंगलों के साथ लगती पंचायतों के प्रधानों को सूचित कर दिया है। वहीं, गुप्तचर पुलिस भी पंचायतों में पहुंच चुकी है। बता दें वीरवार सुबह जैश आतंकियों को लेकर पहुंचे ट्रक को बन टोल प्लाजा में चेकिंग के रोका गया था। इसी दौरान चालक फरार हो गया था।

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