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भारतीय सेना ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में इन ठिकानों पर किया स्ट्राइक

गुरुवार को खबर आई कि भारतीय सेना ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में बने संदिग्ध आतंकी ठिकानों पर पिनप्वाइंट स्ट्राइक की है। इसे सर्दियां शुरू होने से पहले पाक सेना की ओर से भारत में आतंकियों को भेजने के दुस्साहस का जवाब माना गया।

हालांकि, इस मामले में भारतीय सेना की ओर से भी जल्द जवाब आ गया। इसमें कहा गया है कि पीटीआई की खबर 13 नवंबर को हुए सीजफायर उल्लंघन से संबंधित है। गुरुवार को भारतीय सेना की ओर से कोई फायरिंग नहीं की गई। भारतीय सेना के सैन्य संचालन महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल परमजीत सिंह ने कहा है कि एलओसी के पार पीओके में भारतीय सेना की कार्रवाई की खबरें फर्जी हैं।

बीते शुक्रवार (13 नवंबर) को पाक ने उत्तरी कश्मीर में एलओसी के साथ कई इलाकों में गोलाबारी की, जिसमें करीब चार नागरिकों और पांच सुरक्षाकर्मी मारे गए थे। इसके जवाब में भारतीय सेना ने एंटी टैंक गाइडेड मिसाइलों और आर्टिलरी गन के साथ पाक ठिकानों पर कार्रवाई की थी, जिसमें कम से कम आठ पाक सैनिक मारे गए और 12 घायल हुए थे।

पाक ने मारे गए आतंकियों को बताया आम नागरिक
सूत्रों ने कहा, पाकिस्तानी सेना की नागरिकों को निशाना बनाने के कदमों का जवाब भारतीय सेना ने पीओके में मौजूद संदिग्ध लॉन्चपैड्स पर पिनप्वाइंट स्ट्राइक करके जवाब दिया है। सूत्रों ने आगे कहा कि पाकिस्तान ने सांत्वना पाने के लिए और विदेशी दाताओं से मदद पाने के लिए आतंकवादियों की मौत को आम नागरिकों की मौत बताया है।

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भारतीय सेना के इस कदम को सर्दियों का मौसम शुरू होने से पहले पाकिस्तानी सेना की ओर से भारत में आतंकवादियों की घुसपैठ कराने के दुस्साहस का जवाब माना जा रहा है। सामाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार यह जानकारी भारतीय सेना के सूत्रों ने दी है। हालांकि, आज यानी गुरुवार को सेना की ओर से कोई फायरिंग नहीं की गई है।

पाकिस्तान का लक्ष्य जम्मू-कश्मीर में अशांति फैलाना
सूत्रों ने कहा कि पाकिस्तान वैश्विक आतंकवाद रोधी संगठन एफएटीएफ (फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स) से बचने और आतंकवाद को समर्थन देने के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता रहा है। उसका उद्देश्य जम्मू-कश्मीर में अशांति फैलाना है। पिछले कुछ सप्ताह में पाक सेना ने एलओसी के भारतीय क्षेत्र में नागरिकों को निशाना बनाया है।

सूत्रों ने कहा कि पाक सेना ने आक्रामक रूप से भारी गोलाबारी करते हुए आम नागरिकों को निशाना बनाया है और जम्मू-कश्मीर में आतंकियों की घुसपैठ कराने की कोशिश की है। एक आधिकारिक आंकड़े के अनुसार इस साल पाकिस्तान की ओर से की गई गोलाबारी में 21 मासूम नागरिकों ने अपनी जान गंवाई है। 2019 में यह संख्या 18 थी।

सूत्रों ने कहा कि इस्लामाबाद जम्मू-कश्मीर के युवाओं को उग्रवाद की ओर ढकेलने और उनके हाथों में हथियार थमाने के लिए नए तरीकों का इस्तेमाल कर रहा है। वह अपनी जमीन पर पल रहे आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए खुद पर पड़ रहे अंतरराष्ट्रीय दबाव को देखते हुए ऐसी घटनाओं में अपनी संलिप्तता छिपाने की कोशिश कर रहा है।

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