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दिल्ली सरकार ने हाईकोर्ट को बताया, वाहन चलाते समय सभी के लिए मास्क लगाना अनिवार्य

दिल्ली सरकार ने बुधवार को हाईकोर्ट को बताया कि वाहन चलाते समय सभी के लिए मास्क लगाना अनिवार्य है। अप्रैल में ही यह अनिवार्य कर दिया गया था और यह आदेश अभी भी लागू है। सरकार ने यह स्पष्टीकरण एक वकील की याचिका पर जस्टिस नवीन चावला की पीठ के सामने सुनवाई के दौरान दाखिल हलफनामे पर दिया। वकील सौरभ शर्मा ने अपनी याचिका में निजी कार में अकेले होने का हवाला देते हुए ड्राइविंग के वक्त मास्क न पहनने पर 500 रुपये का चालान किए जाने को चुनौती दी थी।

याचिकाकर्ता ने अदालत से कहा कि 9 सितंबर को वह अपने काम पर जा रहा था और दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने उन्हें रोक लिया। कार में अकेले होने के बावजूद मास्क न लगाने के कारण उनका चालान कर दिया गया।
याचिकाकर्ता के वकील जॉबी पी. वर्गीज ने अदालत को बताया कि दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) के चार अप्रैल के कार्यालय आदेश के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रेसवार्ता आयोजित की थी। इस प्रेसवार्ता में कहा गया था कि कार में अकेले ड्राइविंग करने वाले व्यक्ति के लिए मास्क लगाना अनिवार्य नहीं है।
अदालत ने 17 सितंबर को इस मामले में नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत के समक्ष सही स्थिति पेश करने के लिए दो सप्ताह का वक्त मांगा था। अदालत ने मंत्रालय को इसके लिए दो हफ्ते का वक्त देते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि इस मामले की सात जनवरी को होने वाली अगली सुनवाई पर अतिरिक्त समय की मांग न करें। अदालत ने आदित्य कौशिक व दीपक अग्रवाल की तरफ से दाखिल ऐसी ही दो अन्य याचिकाएं भी सात जनवरी को ही सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दी हैं।

अकेले ड्राइविंग के वक्त मास्क नहीं पहनने पर जुर्माना लगाना मनमाना
याचिकाकर्ता शर्मा ने कहा कि चालान जारी करने वाले अधिकारी निजी कार में अकेले यात्रा के दौरान भी मास्क लगाने की अनिवार्यता के संबंध में कोई लिखित आदेश नहीं दिखा सके। उन्होंने चालान पर इस संबंध में लिखने के अनुरोध पर भी गौर नहीं किया, इसलिए याचिकाकर्ता ने विरोध के साथ ‘अवैध’ जुर्माना अदा किया। याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि किसी कानून या अधिसूचना के बगैर निजी वाहन में अकेले ड्राइविंग के वक्त मास्क पहनने को अनिवार्य करते हुए जुर्माना भी कर दिया गया। यह अवैध और मनमाना है। याचिकाकर्ता ने चालान को खारिज करने, जुर्माने में वसूली गई 500 रुपये की राशि वापस कराने और मानसिक उत्पीड़न के बदले 10 लाख रुपये का मुआवजा दिलाए जाने की मांग की है।

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सुप्रीम कोर्ट ने निजी वाहन को माना है सार्वजनिक स्थल
डीडीएमए ने अपने जवाब में कहा है कि अप्रैल के कार्यालय आदेश और इस साल जून की एक अधिसूचना के बाद सार्वजनिक स्थान पर मास्क लगाना अनिवार्य कर दिया गया था। यह भी कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने माना है कि निजी वाहन भी एक सार्वजनिक स्थान है।

 

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