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खुशखबरी : CureVac ने कोरोना वायरस की वैक्सीन को लेकर किया यह बड़ा दावा

कोरोना वायरस का संक्रमण दुनिया के कई देशों में बढ़ता जा रहा है। वहीं दूसरी ओर इसकी वैक्सीन पर एक के बाद एक कामयाबी मिलती नजर आ रही है। उम्मीद की जा रही है कि वह दिन दूर नहीं, जब विभिन्न देश की सरकारों के पास अपने नागरिकों के लिए एक सुरक्षित और कारगर वैक्सीन उपलब्ध होगी।

रूस और चीन के बाद भारत, ब्रिटेन, अमेरिका समेत कई देशों की कंपनियां वैक्सीन पर कामयाबी के करीब पहुंच चुकी है। इसी कड़ी में जर्मन बायोटेक कंपनी CureVac ने दावा किया है कि उसकी कोरोना वैक्सीन इंसानों पर असरदार साबित हुई है। आइए, जानते हैं इस वैक्सीन के बारे में क्या है अपडेट:

जर्मन बायोटेक कंपनी CureVac ने वैक्सीन के अंतरिम फेज-1 डेटा के आधार पर यह दावा किया है कि इंसानों पर वैक्सीन ने अच्छा असर दिखाया है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी फ्रेंज-वर्नर हाज ने एक बयान में कहा है कि हम इस डेटा से बेहद उत्साहित हैं। खबरों के मुताबिक, कंपनी इसी साल के अंत तक वैक्सीन का बड़े पैमानों पर ह्यूमन ट्रायल शुरू करने की योजना बना रही है।

250 लोगों पर अच्छा असर
CureVac कंपनी की इस वैक्सीन का नाम CVnCoV है। इस वैक्सीन को शुरुआती ट्रायल में कामयाब बताया जा रहा है। इस वैक्सीन की खुराक के बाद वॉलेंटियर्स में उतनी एंटीबॉडीज विकसित हुईं, जितनी कोविड के गंभीर मामले में रिकवर होने के बाद बनती हैं। कंपनी के मुताबिक, फेज वन स्टडी में अबतक 250 से ज्यादा लोग शामिल हो चुके हैं।

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वैक्सीन के मामूली साइड इफेक्ट्स
इस वैक्सीन की दूसरी डोज के बाद वॉलेंटिसर्य में साइड इफेक्ट्स भी देखने को मिले हैं। कंपनी के मुताबिक, वॉलेंटियर्स को थकान, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और कुछ में बुखार की शिकायत हुई। हालांकि ये समस्याएं 24 से 48 घंटे के अंदर दूर भी हो गई। खबरों के मुताबिक, इस वैक्सीन ने एंटीबॉडी के साथ टी-कोशिकाएं भी विकसित की है। हालांकि इस बारे में कंपनी का विश्लेषण अभी जारी ही है।

mRNA आधारित है ये वैक्सीन
फार्मा कंपनी CureVac की वैक्सीन एमआरएनए (mRNA) अप्रोच पर आधारित है। अमेरिकी कंपनी मॉडर्ना की वैक्सीन भी mRNA आधारित है। इसके अलावा फाइजर और उसकी जर्मन पार्टनर बायोएनटेक की वैक्सीन भी इसी पर आधारित है।

कैसे काम करती है वैक्सीन?
नॉर्मल वैक्सीन शरीर को वायरस के प्रोटीन की पहचान कर उससे लड़ने के लिए तैयार करती हैं। इसके विपरीत mRNA वैक्सीन बॉडी को चकमा देकर उससे खुद ही वायरल प्रोटीन्स बनवाती है। किसी कोशिका में mRNA को प्रोटीन बनाने के टेंपलेट की तरह इस्तेमाल किया जाता है। इंसान का इम्यून सिस्टम इन प्रोटीन्स की पहचान करता है और उनके प्रति रक्षात्मक प्रतिक्रिया करने लग जाता है।

 

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