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संघर्ष भरी कहानी: मां बन जिस बेटे को पिता ने पाला, वो आज IPL में जड़ रहा चौके-छक्के, बचपन में ही करली थी बल्ले से दोस्ती

इस समय आईपीएल में कई युवा खिलाड़ी अपने दमदार प्रदर्शन से सभी का दिल जीत रहे हैं और इस लिस्ट में दिल्ली कैपिटल्स के जाबांज खिलाड़ी पृथ्वी शॉ का नाम भी शामिल है। शुक्रवार को दिल्ली कैपिटल्स ने 44 रनों से जीत दर्ज की और इस पारी का आकर्षण पृथ्वी शॉ के 64 रन रहे और उन्हें बाद में मैन ऑफ द मैच भी चुना गया। पृथ्वी अब भारतीय टीम के सलामी बल्लेबाजों में गिने जाने लगे हैं और वह कई इंटरनैशनल मैच खेल भी चुके हैं।

इस युवा किक्रेटर की जिंदगी काफी संघर्षपूर्ण रही है। उन्होंने यहां तक पहुंचने के लिए अकेले मेहनत नहीं की, बल्कि उनके पिता ने भी खुद को दोगुना तपाया। जब पृथ्वी शॉ महज चार बरस के थे तो सिर से मां की ममता की छांव उठ चुकी थी। इसके बाद से पिता पंकज को बेटे के लिए मां का भी फर्ज निभाना पड़ा। पंकज ने बेटे को कभी मां की कमी नहीं खलने दी। कपड़े पहनाने से लेकर खिलाने–पिलाने और मैदान में अभ्यास के लिए छोडऩे तक की जिम्मेदारी पिता पंकज ने सलीके से निभाई। भारतीय टीम के लिए खेलते हुए अपने पहले ही टेस्ट में शानदार शतक लगाने वाले पृथ्वी शॉ ने संघर्षों की पथरीली डगर पर पग भरते हुए सफलता का सफर तय किया है। यूं तो भारतीय टेस्ट क्रिकेट टीम में जगह बनाने ही अपने आप में किसी उपलब्धि से कम नहीं, मगर पहले ही मैच में शतक बनाकर पृथ्वी शॉ ने कई रिकॉर्ड बनाए थे। उनके नाम डेब्यू टेस्ट में सबसे कम उम्र में शतक बनाने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज का रिकार्ड है।

पृथ्वी शॉ का परिवार मूलत: बिहार के गया का रहने वाला है। हालांकि अब परिवार महाराष्ट्रियन बन चुका है। बहुत पहले उनके पिता गया से महाराष्ट्र आकर बस गए। तीन बरस की उम्र में ही पिता पंकज पृथ्वी के दिलो-दिमाग में क्रिकेट के प्रति रुचि और प्यार विकसित करने में सफल रहे। जब पृथ्वी शॉ महज तीन साल के थे, तभी पिता ने विरार की क्रिकेट एकेडमी में उनका दाखिला कराया।

अगर आज पृथ्वी शॉ क्रिकेट के सबसे युवा सितारे बनकर उभरे हैं तो इसमें उनके पिता का बहुत बड़ा रोल है। खुद पृथ्वी शॉ यह बात सोशल मीडिया पर जाहिर कर चुके हैं। फादर्स-डे पर वह एक तस्वीर लगाकर अपनी जिंदगी में पिता के महत्व को बयां कर चुके हैं। बकौल पृथ्वी, मेरे पिता ने जो मुझे सबसे बड़ा गिफ्ट दिया, वह है मुझपर भरोसे का। जब पृथ्वी शॉ चार वर्ष के थे, तभी मां की ममता का आंचल छिन गया। तब उनके पिता कपड़ों का बिजनेस करते थे। पत्नी की मौत के बाद बेटे के लालन–पालन की चुनौती सामने आई। इस पर पंकज ने अपना बिजनेस भी कुछ समय के लिए ठप कर दिया। घर में देख-रेख के साथ क्रिकेट प्रैक्टिस में भी पिता साथ देते। उनके पिता ने मां और पिता दोनों के फर्ज निभारकर बेटे को पाला है।

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पृथ्वी शॉ बचपन में अपने दोस्तों और पिता पंकज के साथ जेडब्ल्यू मैरिएट के नजदीक बीच पर क्रिकेट खेला करते थे। उनके पिता उनके लिए गेंदबाजी करते थे। 11 साल की उम्र में जब पृथ्वी को एक कंपनी से सहयोग का ऑफर मिला तो परिवार विरार से मुंबई में बस गया। उन्होंने कम उम्र से ही खेल को जिंदगी बना लिया था। शानदार खेल की बदौलत पृथ्वी ने जनवरी 2017 में तमिलनाडु के खिलाफ मुंबई के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण किया। पहले ही रणजी मैच में वह मैन ऑफ द मैच बने फिर विजय हजारे ट्राफी भी खेले।

वह अंडर 19 क्रिकेट टीम के कप्तान बने। फिर 2018 के अंडर 19 विश्वकप के ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच में 100 गेंदों पर 94 रन बनाए। पृथ्वी शॉ की कप्तानी में तीन फरवरी को भारत ने अंडर 19 विश्वकप जीता। 2018 में दिल्ली डेयरडेविल्स ने 1.2 करोड़ में पृथ्वी शॉ को आईपीएल के लिए खरीदा था। इस बार वो आईपीएल में दिल्ली कैपिटल टीम में खतरनाक प्रदर्शन से चर्चा में हैं।

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