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वास्तु शास्त्र : घर के सामने भूलकर भी नहीं होनी चाहिए ये चीजें, वरना मिलेगी नकारात्मक ऊर्जा

वास्तु शास्त्र हमारे ज़िंदगी को सुगम बनाने  कुछ अनिष्टकारी शक्तियों से रक्षा करने में हमारी सहायता करता माना गया है. एक तरह से वास्तु शास्त्र हमें निगेटिव ऊर्जा से दूर सुरक्षित वातावरण में रखता है. मान्यता अनुसार वास्तु शास्त्र वैदिक निर्माण विज्ञान है, जिसकी नींव विश्वकर्मा जी ने रखी है. जिसमें वास्तुकला के सिद्धांत  दर्शन सम्मिलित हैं, जो किसी भवन निर्माण में अत्यधिक महत्व रखते हैं.

जानकारों के अनुसर भूखंड की शुभ-अशुभ हालात का अनुमान वास्तुविद आसपास मौजूद वस्तुओं को देखकर लगाते हैं. भूखंड की किस दिशा की ओर क्या स्थित है  उसका भूखंड पर क्या असर पड़ेगा, इस बात की जानकारी वास्तु शास्त्र के सिद्धांतों के विश्लेषण से प्राप्त होती है. यदि वास्तु सिद्धांतों और नियमों के अनुरूप भवन निर्माण करवाया जाए तो भवन में रहने वाले लोगों का ज़िंदगी सुखमय होने की आसार प्रबल हो जाती है.

वास्तु की जानकार रचना मिश्रा के अनुसार प्रत्येक मनुष्य की ख़्वाहिश होती है कि उसका घर सुंदर, सुखदायी और सकारात्मक ऊर्जा का वास हो, जहां रहने वालों का ज़िंदगी सुखद एवं शांतिमय हो. इसलिए आवश्यक है कि भवन वास्तु सिद्धांतों के अनुरूप निर्मित हो  उसमें कोई वास्तु गुनाह न हो. यदि घर की दिशाओं में या धरती में गुनाह है तो उस पर कितनी भी लागत लगाकर मकान क्यों न खड़ा किया जाए, फिर भी उसमें रहने वाले लोगों का ज़िंदगी सुखमय नहीं होगा. बोला जाता है कि मुगल कालीन भवनों, मिस्र के पिरामिड आदि के निर्माण-कार्य में भी वास्तु शास्त्र के सिद्धांतों और नियमों का सहारा लिया गया था.

ऐसे समझें वास्तु शास्त्र  ज्योतिष का संबंध
वास्तु की जानकार मिश्रा के अनुसार वास्तु एवं ज्योतिष शास्त्र दोनों एक-दूसरे के पूरक और अभिन्न अंग हैं. जैसे मानवीय शरीर का अपने अंगों के साथ अटूट संबंध होता है. अच्छा वैसे ही ज्योतिष शास्त्र का अपनी सभी शाखाएं प्रश्न शास्त्र, अंक शास्त्र, वास्तु शास्त्र आदि के साथ अटूट संबंध है.

ज्योतिष  वास्तु शास्त्र के बीच निकटता का कारण यह है कि दोनों शास्त्रों का उद्देश्य मानव को प्रगति  उन्नति की राह पर अग्रसर  सुरक्षा प्रदान कराना है. वास्तु सिद्धांत के अनुरूप निर्मित भवन में वास्तुसम्मत दिशाओं में ठीक स्थानों पर रखी गई वस्तुओं के परिणामस्वरूप भवन में रहने वाले लोगों का ज़िंदगी शांतिपूर्ण  सुखमय होता है. इसलिए भवन निर्माण से पहले किसी वास्तुविद से परामर्श लेकर वास्तु सिद्धांतों के अनुरूप ही भवन का निर्माण करवाना चाहिए.

 

‘वास्तु संक्षेपतो वक्ष्ये गृहदो विघनाशनम्

ईशानकोणादारम्भ्य हयोकार्शीतपदे प्यजेत्’

इसका अर्थ है कि वास्तु घर निर्माण करने की वह कला है जो ईशान कोण से प्रारंभ होती है  जिसके पालन से घर के विघ्न दूर होते हैं. प्राकृतिक उत्पात और उपद्रवों से रक्षा होती है यानि घर के वातावरण से नेगेटिविटी दूर होती है.

एक अन्य शास्त्र में वास्तु के बारे में बोला गया है

गृहरचना वच्छिन्न भूमे’

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यानि घर निर्माण के योग्य धरती को वास्तु कहते हैं.

कुल मिलाकर वास्तु वह विज्ञान है जो भूखंड पर भवन निर्माण से लेकर उसमें प्रयोग होने वाली चीजों के बारे में मार्गदर्शन करता है.

वास्तु के जानकारों के मुताबिक वास्‍तु के अनुसार, हमारे इर्द-गिर्द दो प्रकार की एनर्जी रहती है. एक पॉजिटिव एनर्जी- जो हमें खुश रखने के साथ ही हमें अच्‍छे काम करने  परिवार के साथ मिलकर रहने के लिए प्रेरित करती है. वहीं दूसरी होती है नेगेटिव एनर्जी- जिसकी वजह से हम तनाव में रहते हैं  घर का माहौल भी तनावग्रस्‍त रहता है.

दरअसल वास्‍तु से जुड़े कुछ ऐसे गुनाह होते हैं तो नेगेटिव एनर्जी के लिए जिम्‍मेदार माने जाते हैं. हमें अपने घर में  उसके इर्द-गिर्द बीच-बीच में जांचते रहना चाहिए, कि कहीं कोई ऐसी वस्तु तो नहीं पनप रही जो हमारे घर में नेगेटिव एनर्जी को आने के लिए उकसा रही है. ऐसे में आज हम आपको घर के सामने की कुछ ऐसी चीजों के बारे में बता रहे हैं, जो अगर आपके घर में लातीं हैं नेगेटिव एनर्जी

मिश्रा के अनुसार हमारे घर के मुख्‍य द्वार से मां लक्ष्‍मी का प्रवेश होता है  सभी प्रकार की सकारात्‍मक ऊर्जा भी वहीं से आती हैं, इसलिए मुख्‍य द्वार के बाहर गंदे पानी का जमाव नहीं होना चाहिए. यह आपके घर में वास्‍तुदोष होने का मुख्‍य कारण माना जाता है. अगर गलती से गंदे पानी का जमाव घर के पश्विम दिशा में हो तो धन का नुकसान होने की संभावना बढ़ जाती है.

: इसके अतिरिक्त घर के मुख्‍य द्वार के सामने भूलकर भी कांटेदार पौधे नहीं लगे होने चाहिए  न ही आपके घर से ऊंचे वृक्ष होने चाहिए. ऐसा होने से आपके शत्रुओं में इजाफा होता है  आपकी तरक्‍की रुक जाती है. इसके अतिरिक्त परिवार में मतभेद होते हैं  स्वास्थ्य भी बिगड़ी रहती है.

: यहीं नहीं मुख्‍य द्वार के सामने कभी भी ऐसे डस्‍टबिन न रखें कि आते-जाते आपकी नजर उस पर पड़े. इसके अतिरिक्त घर के सामने कूड़े का ढेर भी नहीं लगा होना चाहिए. यह कष्‍टदायी होता है  धन हानि को बढ़ावा देता है. इसके अतिरिक्त आपके घर के अच्छा सामने यदि बिजली का खंबा होता है तो भी आपकी तरक्‍की में बाधा उत्‍पन्‍न होती है. ऐसा होने लक्ष्‍मी के आपके घर में प्रवेश में भी बाधा आती है.

: वास्तु के जानकारों के अनुसार अक्‍सर देखने में आता है कि लोग सजावट के लिए अपने घर के आगे बेल वाले पौधे लगा लेते हैं  बेल को घर के सबसे सामने की दीवार पर चढ़ा देते हैं. वास्‍तु में इसे गुनाह माना गया है.

इससे आपके शत्रुओं की संख्‍या बढ़ती है  विरोधी आपके विरूद्ध साजिश रचने लगते हैं. माना जाता है कि घर के सामने की दीवार पर बेल चढ़ने से पड़ोसियों से भी खटपट रहती है  घर में नकारात्‍मक ऊर्जा प्रवेश करती है.

: इसके साथ ही कई बार ऐसा भी देखा गया है कि सड़क निर्माण के बाद आपके मुख्‍य द्वार से ऊंची हो जाती है. ऐसी सड़क का होना बहुत ही कष्‍टदायी होता है. इसे एक बड़ा वास्‍तुदोष मान जाता है. यदि आपका मुख्‍य द्वार भी ऐसा हो गया है तो बेहतर होगा कि मरम्‍मत करवाकर इसे ठीक करवा लें  मुख्‍य द्वार को सड़क से ऊंचा करवा लें.

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