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देहरादून: छात्रवृत्ति घोटाले में समाज कल्याण विभाग के उपनिदेशक पर लटकी गिरफ्तारी की तलवार

समाज कल्याण विभाग के उपनिदेशक पर छात्रवृत्ति घोटाले में अभियोजन चलाने की अनुमति प्रदान कर दी है। उपनिदेशक जगमोहन कफोला के खिलाफ दशमोत्तर छात्रवृत्ति घोटले आरोप है। इस मामले में शासन ने उन पर अभियोजन चलाने की अज्ञा प्रदान कर दी है। इस संबंध में बीते सोमवार को समाज कल्याण के सचिव एल फैनई ने आदेश जारी किए हैं।

समाज कल्याण के सचिव एल फैनई ने आदेश जारी करने के बाद से ही दशमोत्तर छात्रवृत्ति घोटाले में कफोला पर गिरफ्तारी की तलवार भी लटक गई है। बता दें कि उनसे पहले भी अभियोजन की मंजूरी के बाद संयुक्त निदेशक और एक जनजातीय कल्याण के उपनिदेशक को गिरफ्तार कर लिया गया था। कफोला पर नैनीताल जिले में जिला समाज कल्याण अधिकारी के पद पर रहते हुए छात्रवृत्ति योजना में कथित अनियमितता के आरोप लगे हैं। उनके कार्यकाल के दौरान एसआईटी (SIT) को छात्रवृत्ति के आवंटन में गड़बड़ी के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं।

प्राप्त हुए इन साक्ष्यों के आधार पर पर पुलिस उपाधीक्षक शांतनु पाराशर को विवेचक बनाया गया। उन्होंने शासन से सात जुलाई 2020 और 11 जुलाई 2020 को पत्र भेजकर कफोला के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 466, 468, 471, 120 बी तथा 13(1) डी व 13(2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत अभियोजन की मंजूरी मांगी थी।

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बता दें कि न्याय विभाग की सलाह के बाद शासन ने जांच अधिकारी से प्रकरण की केस डायरी तलब की। केस डायरी प्राप्त होने के बाद सोमवार को सचिव ने आदेश जारी किए। इस तरह समाज कल्याण विभाग का एक और अधिकारी छात्रवृत्ति घोटाले की जांच की गिरफ्त में आ गया है।

गौरतलब है कि छात्रवृत्ति घोटाले की जांच में समाज कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक गीता राम नौटियाल को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। पांच तत्कालीन सहायक समाज कल्याण अधिकारियों पर भी अभियोजन की कार्रवाई चलाई गई। जनजातीय कल्याण निदेशालय के उपनिदेशक अनुराग शंखधर भी अभियोजन के दौरान जेल गए।

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