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केंद्र में एनडीए की सहयोगी शिअद ने केंद्रीय मंत्री पद को त्यागा, जाने कारण

केंद्र में एनडीए की सहयोगी शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने कृषि अध्यादेशों के विरोध स्वरूप अपने हिस्से का एकमात्र केंद्रीय मंत्री पद त्यागकर गुरुवार को पंजाब के किसानों के बीच अपनी खिसकती जमीन तलाशने की प्रयास की है.

शिअद प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने अपनी पत्नी और केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल के इस्तीफे को पार्टी द्वारा किसानों के लिए एक बड़े बलिदान के रूप में पेश किया है लेकिन अब तक एनडीए का भाग बने रहने को कारण शिअद पर कांग्रेस पार्टी लगातार हमलावर है. वैसे केंद्रीय मंत्री का पद त्यागने के कदम को अकाली दल की पंजाब की किसानी में वापसी की प्रयास के रूप में देखा जा रहा है.

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तीन कृषि बिलों पर अब तक सहयोगी बीजेपी की ही बोली बोलती रही 
शिअद पहली बार बिलों के विरूद्ध मुखर होकर खुद को पंजाब के किसानों का सच्चा हितैषी साबित करने की प्रयास में जुट गई है. दूसरी ओर, सूबे में कांग्रेस पार्टी इस मामले पर किसानों व किसान संगठनों का योगदान हासिल करने के मुद्दे में अकाली दल को बहुत ज्यादा पीछे छोड़ चुकी है. शिअद के एनडीए से जुड़े रहने के कारण कांग्रेस पार्टी प्रदेश के किसानों के बीच शिअद को किसान विरोधी व सत्ता की लालची पार्टी के रूप में प्रचारित करने में सफल रही है. यही कारण भी है कि इन दिनों प्रदेश भर में कृषि बिलों के विरूद्ध किसान संगठनों के विरोध प्रदर्शनों में नरेन्द्र मोदी सरकार के साथ-साथ अकाली दल की जमकर आलोचना हो रही है.दरअसल, सारे देश का पेट भरने वाले प्रांत के नाम से जाने जाने वाले पंजाब में कृषि व किसान ऐसे अहम मामले हैं कि कोई भी सियासी दल इन्हें अनदेखा कर अपना वजूद कायम रख पाने की कल्पना भी नहीं कर सकता है. साल 2017 के विधानसभा चुनाव में किसानों के लोन माफी के वादे ने कांग्रेस पार्टी को सत्ता दिलाई जबकि उससे पहले किसानों को मुफ्त बिजली के वादे की बदौलत अकाली दल (बादल) सत्ता पर काबिज होता रहा है.

किसानों की बढ़ती सुसाइड ओं के बीच कांग्रेस पार्टी का लोन माफी का वादा अकाली दल की दस वर्ष पुरानी सरकार को पदच्युत करने में अच्छा रहा था. इसमें शक नहीं कि बीते कुछ ही महीनों में कैप्टन अमरिंदर सिंह व प्रदेश कांग्रेस पार्टी प्रदेश के किसानों को यह समझा चुके हैं कि अकाली दल कृषि बिलों का समर्थन करके उन्हें बर्बाद करने की तैयारी कर चुका है. ऐसे में अकाली दल का इस्तीफे की पॉलिटिक्स भरा पहला कदम उसे पंजाब में कितना सहायता गार देगा, यह अगले दो-तीन दिन में ही सामने आ जाएगा क्योंकि गुरुवार को अकाली दल इस सवाल के घेरे में है कि उसने एनडीए से नाता क्यों नहीं तोड़ा?

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