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चीन से तनाव के बीच लद्दाख पहुंचे सेना प्रमुख नरवणे, LAC के साथ सभी संवेदनशील क्षेत्रों में आक्रामक रुख जारी रखेगी भारतीय सेना

पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ बढे़ सीमा तनाव के बीच सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे गुरुवार सुबह लद्दाख पहुंचे। यहां उन्होंने साउथ पैंगोंग समेत अन्य जगहों के हालात जाने। सूत्रों ने कहा कि पूर्वी लद्दाख के दो दिवसीय दौरे पर सेना प्रमुख नरवणे को शीर्ष कमांडर क्षेत्र की मौजूदा स्थिति से अवगत कराएंगे।

सेनाध्यक्ष एमएम नरवणे (फाइल फोटो)

इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को पूर्वी लद्दाख में स्थिति की व्यापक समीक्षा की थी। इस सिलसिले में चली बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत, सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे, वायु सेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया सहित अन्य शामिल हुए थे। बताया गया था कि लगभग दो घंटे चली बैठक में यह निर्णय लिया गया कि भारतीय सेना वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के साथ सभी संवेदनशील क्षेत्रों में अपना आक्रामक रुख जारी रखेगी ताकि चीन के किसी भी ‘दुस्साहस’ से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।

बताते चलें कि पूर्वी लद्दाख में चीन की उकसाने वाली कार्रवाई को नाकाम करने के कुछ दिनों बाद भारत ने पैंगोंग त्सो इलाके के दक्षिणी तट पर कम से कम तीन महत्वपूर्ण पर्वत चोटियों पर अपनी उपस्थिति और मजबूत की है। सरकारी सूत्रों ने बुधवार को इसके बारे में जानकारी दी। एलएसी के भारतीय सीमा के अंदर पैंगोंग झील के उत्तरी तट पर भी एहतियाती उपायों के तहत सैनिकों की तैनाती में कुछ बदलाव किए गए हैं। इलाके में तनाव बना हुआ है।

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LAC पर चीन के साथ तनाव के बीच लद्दाख पहुंचे सेना प्रमुख

चीनी कोशिशों के मद्देनजर भारतीय सेना ने 3,400 किमी लंबे एलएसी पर अपने सभी अग्रिम सैन्य ठिकानों को चौबीसों घंटे सतर्क रहने के लिए अलर्ट कर दिया है। गलवां घाटी झड़प के बाद भारत ने अरूणाचल प्रदेश और सिक्किम सहित सभी सीमावर्ती इलाकों में अतिरिक्त सैनिक एवं हथियार प्रणाली भेजी हैं। सोमवार को भारतीय सेना ने कहा कि चीनी सेना ने 29 और 30 अगस्त की दरमियानी रात पैंगोंग झील के दक्षिण तट पर यथास्थिति में एकतरफा तरीके से बदलाव करने के लिए ‘उकसाने वाली सैन्य गतिविधियां’ कीं।

वहीं सूत्रों ने बताया कि तनाव घटाने के लिए दोनों पक्षों के सेना कमांडरों की बुधवार को हुई एक और दौर की वार्ता असफल रही। यह बातचीत करीब सात घंटे चली।सूत्रों ने यह भी बताया कि सोमवार और मंगलवार को छह घंटे से अधिक समय तक इसी तरह की वार्ता हुई, लेकिन कोई ‘ठोस नतीजा’ नहीं निकल सका। उन्होंने बताया कि भारत ने पूर्वी लद्दाख में कई पर्वत चोटियों और स्थानों पर उपस्थिति बढ़ा कर पिछले कुछ दिनों में रणनीतिक बढ़त हासिल की है। क्षेत्र में यथास्थिति में बदलाव करने की चीन की नाकाम कोशिशों के मद्देनजर सैनिकों की तैनाती बढ़ाई गई है।

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