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लोकल खिलौनों के लिए भी बनें वोकल : मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उद्यमियों से खिलौनों के बाजार में दुनिया भर में भारत की पैठ बनाने का आह्वान करते हुए आज देशवासियाें से भी कहा कि वे देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ‘वोकल फॉर लोकल’ की मुहिम के तहत स्वदेशी खिलौनों को बढावा दें।

प्रधानमंत्री ने आकाशवाणी पर अपने मासिक रेड़ियो कार्यक्रम मन की बात में कहा कि दुनिया में खिलौनों का सात लाख करोड़ रूपये से अधिक का बाजार है और इसमें हमारी हिस्सेदारी कम है। उन्होंने कहा इसमें अपनी हिस्सेदारी बढाने और देश को खिलौनों का केन्द्र बनाने के लिए सभी को आगे आना होगा। विशेष रूप से नये उद्यमियों का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा , “ खिलौनों के साथ हम दो चीजें कर सकते हैं – अपने गौरवशाली अतीत को अपने जीवन में फिर से उतार सकते हैं और अपने स्वर्णिम भविष्य को भी सँवार सकते हैं | मैं अपने स्टार्ट अप मित्रों को, हमारे नए उद्यमियों से कहता हूँ टीम के तौर पर आइए मिलकर खिलौने बनाएं | अब सभी के लिये लोकल खिलौनों के लिये वोकल होने का समय है | आइए, हम अपने युवाओं के लिये कुछ नए प्रकार के, अच्छी क्वालिटी वाले, खिलौने बनाते हैं | खिलौना वो हो जिसकी मौजूदगी में बचपन खिले भी, खिलखिलाए भी | हम ऐसे खिलौने बनाएं, जो पर्यावरण के भी अनुकूल हों |”

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उन्होंने कहा देश में लोकल खिलौनों की बहुत समृद्ध परंपरा रही है| कई प्रतिभाशाली और कुशल कारीगर हैं, जो अच्छे खिलौने बनाने में महारत रखते हैं | कुछ क्षेत्र खिलौनों के केन्द्र के रूप में विकसित भी हो रहे हैं जैसे, कर्नाटक के रामनगरम में चन्नापटना, आन्ध्र प्रदेश के कृष्णा में कोंडापल्ली, तमिलनाडु में तंजौर, असम में धुबरी, उत्तर प्रदेश का वाराणसी। प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस राष्ट्र के पास इतनी विरासत हो, परम्परा हो, विविधता हो, युवा आबादी हो, क्या खिलौनों के बाजार में उसकी हिस्सेदारी कम होना अच्छा लगता है।

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