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भारत और चीन के बीच युद्ध हुआ तो अमेरिका नहीं देगा हमारा साथ? ये है बड़ी वजह

यह तो किसी से छुपा नहीं है कि भारत के रिश्ते चीन और पाकिस्तान के साथ कैसे हैं। मौजूदा समय में एलओसी पर जिस तरह का संग्राम देखने को मिल रहा है। उससे तो यह साफ जाहिर होता है कि भारत के रिश्ते चीन के साथ कैसे हैं। उधर, अगर पाकिस्तान की बात करें तो भारत और पाकिस्तान के रिश्ते तो हमेशा से कटू रहे हैं। अब ऐसे में यह सवाल लोगों के जेहन में तैर रहा है कि यदि भारत का चीन के साथ युद्ध होता है तो पाकिस्तान किसका साथ देगा? इस सवाल का जवाब आप भी सहज दे सकते हैं कि लाजिमी है कि अगर भारत और चीन के बीच युद्ध हुआ तो निश्चित तौर पर पाकिस्तान चीन के साथ देगा, मगर यदि इतिहास में जाए तो 1962 में जब भारत का चीन के साथ युद्ध हुआ तो पाकिस्तान ने कोई हस्तक्षेप नहीं किया था।  इसके तीन सालों के बाद 1965 में जब पाकिस्तान ने भारत पर हमला किया तो चीन ने भी अपनी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन आज इन तीनों ही देशों के बीच स्थिति बदल चुकी है।

आज स्थिति कुछ इस तरह बदल चुकी है कि सरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत और चीन के बीच युद्ध में पाकिस्तान अपने सदाबहार मित्र ड्रैगन का साथ निभाएगा। ध्यान रहे कि जब 1962 में चीन और 1965 में भारत का चीन और पाकिस्तान के साथ युद्ध हुआ तो अमेरिका ने खुलकर भारत का साथ दिया था। तमाम हथियार मुहैया कराए थे, ताकि युद्ध पर फतह पाई जा सके, मगर आज और पहले की अमेरिका की स्थिति मे बहुत बदलाव आ चुका है। आज की  तरीख में अमेरिका की एशिया में स्थिति कमजोर हो चुकी है तो अनवरत इस बात की संंभावना जताई जा रही है कि संभवत: अमेरिका भारत का पहले जैसा साथ न दे सके। इसके पीछे की वजह है कि यह मौजूदा हालात में न तो अमेरिका की चीन सुनेग और न ही पाकिस्तान। ध्यान रहे कि जिस तरह से अमेरिका खुले मंच से कोरोना महामारी का जिम्मेदार चीन को ठहराया और उधर आतंकवाद का जिम्मेदार पाकिस्तान को ठहारया है, उससे अमेरिका के रिश्ते देशों से खटास भरे हो चुके हैं।

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सेना का आधुनिकरण
वहीं बात अगर भारत और चीन के बीच सैन्य स्थिति की करें तो चीन की तुलना में भारत को बहुत कुछ करना बाकी है। चीन बहुत पहले ही अपनी सेना का आधुनिकरण कर चुका है, जबकि भारत में यह प्रक्रिया अभी अपने शैशवकाल में है। चीन लगातार सीमा पर से अपने सैनिकों की संख्या घटाते जा रहे हैं, लेकिन इस संदर्भ में विशेषज्ञ मुख्तलिफ राय रखते हैं। उनका कहना है कि चीन ऐसा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि जो काम सेना को करना है, वो काम अब वहां तकनीक कर रहा है, लिहाजा वे सेना पर आने वाले खर्च को स्थानांतरित कर तकनीक पर लगा रहे हैं।

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