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देश में पहली बार हुआ कोरोना संक्रमित के शव का पोस्टमार्टम, डॉक्टरों के हाथ लगी ये अहम जानकारी

नई दिल्ली। कोरोना वायरस के संक्रमण के लक्षणों को लेकर कई तरह की चर्चाएं है, कुछ लक्षण मेल खाते हैं तो कुछ अपवाद नजर आते हैं। क्योंकि तार्किकता के आधार पर सत्यता का पता नहीं लगाया जा सकता। सत्यता के लिए प्रेक्टिकल का होना बेहद जरूरी है। कोरोना काल के इतने महीनों का समय बीत जाने के बावजूद भी इसके लक्षणों, शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर आज भी असमंजस्य की स्थिति बनी हुई है। वहीं कोरान के वायरस मृत शरीर में कितनी देर तक जिंदा रहता है। शरीर के किन अंगों को कितना नुकसान पहुंचाता है। यह सब जानने के लिए देश में पहली बार कोरोना मरीज की डेड बॉडी का पोस्टमार्टम किया गया है।

जानकारी के मुताबिक भोपाल स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान को इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च से पॉस्टमार्टम की अनुमति मिलने के बाद संक्रमित व्यक्ति की डेड बॉडी पर रिसर्च की गई। संक्रमित की डेड बॉडी का पोस्टमार्टम करते समय डॉक्टर्स की टीम ने पीपीई किट समेत अन्य सुरक्षा से जुड़ी गाइडलाइंस का पालन किया। इस मामले में एम्स भोपाल की तरफ से बताया गया है कि रिसर्च के लिए कोरोना संक्रमित शव के पोस्टमार्टम का यह पहला मामला है। आगे और जानकारी हासिल करने के लिए अभी और संक्रमित शवों का पोस्टमॉर्टम किया जाएगा। इसी के आधार पर ही फाइनल रिपोर्ट तैयार की जाएगी। मामले की जानकारी देते हुए भोपाल एम्स के डायरेक्टर डॉक्टर सरमन सिंह ने बताया कि पोस्टमार्टम से संक्रमित व्यक्ति के शरीर के अंगों पर कोरोना वायरस के पड़ने वाले प्रभाव की जानकारी प्राप्त की जा सकेगी।

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उन्होंने बताया पोस्टमार्टम से पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि कोरोना संक्रमित होने के बाद यह वायरस दिल, फेफड़े, दिमाग या दूसरे अंगों पर किस तरह से और कितना प्रभाव डालता है। बताते चलें कि पोस्टमार्टम के दौरान फॉरेंसिक मेडिसिन के अलावा तीन अन्य टीमों ने भी शव का पोस्टमार्टम किया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रक्रिया से बड़े तथ्य हाथ लगने की उम्मीद है। इन लोगों का तर्क ​है कि बचाव के बारे में जानना इलाज से ज्यादा जरूरी है।

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