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भारतीय क्रिकेट टीम का एक ऐसा खिलाड़ी, जिसको अपने दोस्त की बहन से हुआ प्यार, फिर रचाई थी शादी

प्यार..मोहब्बत और इश्क में जब कभी-भी मजहब की दीवारे आगे आई, तो उसे हमारे प्रेम पुजारियों ने धराशायी कर अपनी मोहब्बत को हासिल करके ही दम लिया है। अब इसी बीच आज हम आपको एक ऐसी ही प्रेम कहानी के बारे बताने जा रहे हैं, जिनके बीच भी जब मजहब आड़े आई इन्होंने न तो अपनों की परवाह की और न जमाने की.. अगर किसी की परवाह की तो महज अपने मोहब्बत की। आज हम आपको भारतीय क्रिकेट टीम के उस खिलाड़ी के बारे में बतााने जा रहे हैं, जिसे अपने ही दोस्त की बहन से प्यार हो गया था। दोनों एक दूसरे से बेइंतहा मोहब्बत करते थे, मगर जब सामने आई मजहब की दीवार तो उन्होंने इसे धराशायी करना ही मुनासिब समझा.. तो आखिर कौन था वो खिलाड़ी जानने के पढ़िए हमारी ये खास रिपोर्ट

अजीत अगरकर.. कभी भारतीय क्रिकेट टीम में इनकी तूती बोला करती थी। बेहद कम समय में ही इन्होंने टीम में अपनी जगह सुनिश्चित कर ली थी। 1 अप्रैल 1998 को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ कोच्चि वनडे से करियर की शुरुआत करने वाले अजित बेहद कम समय में ही भारतीय टीम में अपनी जगह पक्की कर ली थी। 1 अप्रैल 1998 को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ कोच्चि वनडे से करियर की शुरुआत करने वाले अजित बेहद कम समय में भारतीय टीम में अपनी जगह पक्की कर ली, उसी साल जिम्बॉब्बे के खिलाफ उन्हें टेस्ट कैप भी मिला। अगरकर ने 191 वनडे मैचों में 288 विकेट चटकाये थे। काफी समय में इन्होंने क्रिकेट की दुनिया में कई नए आयाम गढ़ लिए थे।

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अभी हाल ही में इ्न्होंने मुख्य चरयनकर्ताओं  की फेहरिस्त में अपना नाम दर्ज करवाने के लिए आवेदन किया था, मगर इनका आवेदन इस वर्ष स्वीकार नहीं किया गया है। अब अगले वर्ष इनका नाम मुख्य चयरनकर्ताओं में आना तय माना जा रहा है… तो इसी बीच हम आपको अपनी इस रिपोर्ट में उनके करियर की उपलब्धि के बारे में नहीं बल्कि उनके निजी जिंदगी के बारे कुछ अनकही बातों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें जानकर आप हैरत में पड़ जाएंगे।

अजीत अगरकर के एक मित्र थे मजहर अकसर, जो अपनी बहन फातिमा को अजीत अगरकर का मैच दिखाने ले जाते थे। अजीत अगरकर और मजहर अकसर बहुत अच्छे दोस्त थे। इसके बाद अजहर ने ही अपनी बहन की मुलाकात अजीत से करवाई थी। फिर आहिस्ता-आहिस्ता न जाने कब यह मुलाकात मोहब्बत में तब्दील हो गई, उन्हें खुद ही मालूम न पड़ा। इसके बाद मुलाकात से मोहब्बत और मोहब्बत से शादी तक का सफर कब तय हो गया। इन्हें खुद को मालूम नहीं पड़ा।  मगर इनकी शादी के बीच इनका महजबी भेद आड़े आ रहा था। एक तरफ जहां फातिमा मुस्लिम थी तो वहीं अजीत अगर मराठी पंडित। ऐसे में दोनों की शादी को लेकर उनका परिवार राजी नहीं था। मगर  अजीत अगरकर ने इनकी परवाह किए बगैर शादी करने का फैसल कर लिया और अंत में इनके परिवार को भी  इनके फैसले के आगे नतसमस्तक होना पड़ा। आज की तारीख में इनकी एक काफी अच्छी खासी फैमिली है। दोनों ही एक-दूसरे को लेकर बेहद केयरिंग हैं। दोनों एक-दूसरे से बहुत प्यार करते हैं।

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