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आपने कभी देखी है ऐसी शादी, जहां एक ही घर में बारात लेकर पहुंची तीन दुल्‍हनें

विवाह संस्कार हिंदू धर्म में काफी मायने रखता है इसमें वर-वधु यह प्रतिज्ञा करते हैं कि हमारा चित्त एक-सा हो। हममें किसी प्रकार का भेद- भाव न हो। इस प्रकार उनका गृहस्थ जीवन सुख, शांति और समृद्धि पूर्ण होगा और कोई कलह न होगा और उनकी संतान भी उत्तम होगी। विवाह का शाब्दिक अर्थ है वर का वधू को, उसके पिता के घर से अपने घर ले जाना। किंतु यह शब्द उस पूरे संस्कार का द्योतक है, जिससे यह कार्य संपन्न किया जाता था।

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भारत की वैदिक संस्कृति के अनुसार सोलह संस्कारो को जीवन के सबसे महत्वपूर्ण संस्कार माने जाते है। उन्ही सोलह संस्कारो में से एक है विवाह संस्कार जिसकी अनुपस्थति में मानव जीवन पूर्ण नहीं होता। हिन्दू धर्म में विवाह संस्कार को सोलह संस्कारो में से एक माना जाता है। इस संस्कार के बाद ही व्यक्ति गृहस्थाश्रम में प्रवेश करता था। प्राचीन भारतीय विद्वानों के अनुसार इस संस्कार के दो प्रमुख उद्देश्य थे।
मनुष्य विवाह करके देवताओं के लिए यज्ञ करने का अधिकारी हो जाता था और पुत्र उत्पन्न कर सकता था। लेकिन भारत अब बदल रहा है वहीं इसके साथ ही रूढ़िया भी टूट रही हैं। अब जमाना में बदलाव शुरू हो चुका है जो आपको हर जगह देखने को मिलता होगा पहले की तरह न ही लोगों की सोच रह गई है और न ही रूढि़यों में जकड़ी हुई वो दकियानुसी परंपराएं। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि आजकल शादी का माहौल है हर तरफ शादियां देखने भारतीय विवाहोत्सव का तौर-तरीका धीरे-धीरे बदल रहा है।
भारत में शादीयों में फिजूलखर्ची और दिखावे तो बहुत होते हैं ये आपने भी देखे होंगे लेकिन अब लोग इससे बचने लगे हैं। जी हां इससे जहां लोगों को शांति और सुकून मिल रहा है तो पैसों की बर्बादी भी बच रही है। कहीं तीन-तीन दुल्हन बरात लेकर पहुंच रही हैं, तो कहीं साल भार के सभी विवाह आयोजनों का एक ही सामूहिक भोज दिया जा रहा है। वैसे सामान्‍यतौर पर कई परिवार शादी समारोह को और भी ज्‍यादा भव्‍य बनाने के लिए काफी पैसे पानी की तरह बहा देते हैं। उनके लिए उत्तराखंड का जनजातीय क्षेत्र जौनसार-बावर एक नजीर देता दिखता है।
जी हां क्‍योंकि यहां विवाह समारोह में दिखावे के नाम पर होने वाली फिजूलखर्ची को सामाजिक बुराई माना जाता है। बता दें कि यहां दहेज रहित शादी व फिजूलखर्ची रोकना भारतीय संस्कृति का प्रमुख हिस्सा माना जाता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जौनसार-बावर के ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में परंपरा के अनुसार दुल्हन बरात लेकर दूल्हे के घर पहुंचती है लेकिन जनजातीय परपंरा के अनुसार देहरादून जिले के इन ग्रामीण इलाकों में आज भी दुल्हन गाजे-बाजों के साथ दूल्हे के घर बरात लेकर पहुंचती है।
वहीं इस परपंरा को कायम रखते हुए अटाल के प्रधान ने अपने तीन भाइयों का विवाह जौनसारी रिवाज व संस्‍कृति के अनुसार एक ही दिन कराने का फैसला किया है। विवाह समारोह आगामी छह मार्च को आयोजित किया गया है। जिसकी तैयारी में ग्रामीण अभी से जुट गए हैं इस दिन तीन दुल्हन एक साथ बरात लेकर प्रधान के घर पहुंचेंगी। विवाह में करीब दो हजार लोग शामिल होंगे।
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