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शादीशुदा होकर भी पवित्र और कुंवारी मानी गई है यह स्त्रियां..!!

मित्रों अक्‍सर आप लोगों को सोशल मीडिया के माध्‍यम से कई जानकारियां मिली होगी, जो शायद आप लोगों को पता भी नही होगी, हालांकि हम लोग समय समय पर महत्‍वपूर्ण जानकारियों से आपको अवगत कराते रहते है, उसी क्रम में आज भी हम एक ऐसी जानकारी लेकर आये है, जो शायद ही आप लोगों को पता होगी। आपको बता दे कि कुछ स्त्रियां शादीशुदा होकर भी पवित्र और कुंवारी मानी गई है।

आपकी जानकारी के लिये बता दे कि हमारे पुराणों में भी इन स्त्रियों की चर्चा की गई है, आपको बता दे कि रामायण और महाभारत काल में कुछ स्त्रियों का वर्णन किया गया है, जो कि विवाहित होने के पश्‍चात भी कुंवारी मानी जाती है, जो कुछ इस प्रकार से है……
मंदोदरी : मंदोदरी अदभुत सौन्‍दर्या के साथ ही बुद्धिमान भी थी, इनका विवाह रावण के साथ हुआ था, माना जाता है कि मंदोदरी रावण को सही गलत की राह दिखाती थी पर रावण उस बात को मानता नहीं था रावण की मृत्यु के पश्‍चात श्री राम ने विभीषण को मंदोदरी को आश्रय देने के लिए कहा अपने इन गुणों के कारण मंदोदरी कुंवारी मानी जाती है।
द्रौपदी : पांच पतियों की पत्नी होने पर भी द्रौपदी का व्यक्तित्व काफी मजबूत था परन्तु इसके बावजूद उन्हें कुंवारी कन्याओं की श्रेणी में माना जाता है। जीवनभर द्रौपदी ने पांचों पांडवों का हर परिस्थिति में साथ दिया और कभी किसी एक पति के साथ रहने की जिद्द नहीं की। अपने कर्तव्यों का पालन ईमानदारी से निभाने वाली द्रौपदी का स्मरण धर्म ग्रंथों में महापाप को नाश करने वाला माना गया है।
कुंती : हस्तिनापुर के राजा पांडु की पत्नी कुंती ने शादी से पहले ऋषि दुर्वासा के मंत्र से सूर्य का ध्यान करके पुत्र की प्राप्ती की। शादी के पश्‍चात पांडु की मौत के बाद कुंती ने वंश खत्म नहीं हो जाए इसलिए उसी मंत्र का दोबारा इस्तेमाल करके अलग-अलग देवताओं से संतान प्राप्ती की, जिसके कारण उन्हें कौमार्या माना गया है।
अहिल्या : यह गौतम की पत्नी थी और वह अत्यंत सुंदर थी वह इतनी सुंदर थी के इंद्रदेव ने गौतम का रूप लेकर उनके साथ समय बिताया था इस क्रोध में आकर ऋषि गौतम ने पत्थर बनने का श्राप दे दिया, पर वह अपने पति ऋषि गौतम के प्रति बहुत ईमानदार थी इस वजह से उन्होंने उनका श्राप स्वीकार कर लिया और उन्होंने पत्थर बनकर गुजारा किया परंतु जब ऋषि का गुस्सा शांत हुआ और उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ तो उन्होंने इस श्राप से छुटकारा पाने के संबंध में बताया कि वह श्रीराम के चरणो को छू कर मुक्त हो जाएगी इसके बाद श्री राम ने उन्हें पवित्र कहा और वह मुक्त हो गई इस वजह से उन्हें कुवारी माना जाता है।
तारा : तारा का जन्म समुद्र मंथन के दौरान हुआ था तारा सुग्रीव के भाई बाली की पत्नी थी भगवान विष्णु ने तारा का हाथ बाली को दे दिया था वह इतनी बुद्धिमान थी कि वह प्राणियों की भाषा समझ सकती थी एक बार बाली असुरों से युद्ध करने के लिए चले गए थे और लोट कर नही आए तो सभी ने उन्हें मरा हुआ समझ लिया इसके बाद सुग्रीव ने उस राज्य को और तारा को अपने अधीन ले लिया परंतु एक दिन बाली लौटा और सुग्रीव को राज्य से बाहर निकाल दिया जब सुग्रीव श्री राम जी की शरण में चले गए तो तारा समझ गई थी सुग्रीव अकेला नहीं है उसने बाली को समझाने की कोशिश की पर बाली गुस्से में था तो तारा को छोड़कर चला गया फिर श्री राम जी ने बाली का वध कर दिया पर मरते हुए बाली ने सुग्रीव से कहा तारा के विचारों को सम्मान देने के लिए क्योंकि हर पत्नी अपने पति की भलाई चाहती है इसलिये तारा को पवित्र माना जाता है।

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