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अखिलेश की पहली पसंद बनी जया, चौथी बार जाएंगी राज्यसभा

लखनऊ : राज्यसभा चुनाव को लेकर पार्टियां अपने अपने रूख साफ कर रही है, इसी बीच अखिलेश के सामने सबसे बड़ी समस्या थी, जिससे अब उन्हें छुटकारा मिल गया है। पिछले कुछ दिनों से सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव बड़ी दुविधा में थे, क्योंकि उन्हें 6 में से किसी एक को राज्यसभा भेजना था, जिसकी वजह से उनके सामने बहुत बड़ी मुसीबत आन पड़ी थी, लेकिन अखिलेश बड़ी ही चतुराई के साथ इस मुसीबत से बाहर आ गए। आइये जानते हैं कि हमारे इस रिपोर्ट में क्या खास है?

देश के सबसे बड़े राज्य यूपी के 10 राज्यसभा सीटों पर चुनाव होने वाले हैं, जिसमें से 6 सीटे समाजवादी पार्टी की है, ऐसे में अब उनके पास विधायक नहीं है, जिसकी वजह से वे केवल एक ही सदस्य को राज्यसभा फिर से भेज सकते हैं, जिसकी रेस में जया बच्चन ने बाजी मार ली, क्योंकि जया अखिलेश की पहली पसंद बनी। बताते चलें कि अखिलेश के लिए यह फैसला करना बहुत था, क्योंकि इस कड़ी में उनकी करीबी नरेश अग्रवाल भी थे, लेकिन अखिलेश ने नरेश का पत्ता काटते हुए जया को राज्यसभा भेजने का फैसला लिया।

अखिलेश की पहली पसंद बनी जया, ये दिग्गज रेस में थे शामिल


बताते चलें कि समाजवादी पार्टी के 6 सांसद राज्यसभा से रिटायर होने वाले हैं, जिसमें किरणमय नंदा, दर्शन सिंह यादव, नरेश अग्रवाल, जया बच्चन, मुनव्वर सलीम और आलोक तिवारी का नाम शामिल है। ऐसे में अब सपा पार्टी केवल एक ही सांसद राज्यसभा भेज सकती है, क्योंकि अखिलेश के पास केवल 47 वोट है। जया बच्चन के लिए अखिलेश ने दिग्गज नेताओं का पत्ता काट दिया, इसके पीछे उनकी कोई न कोई रणनीति जरूर ही रही होगी।

जानिये, यूपी की 10 राज्यसभा सीटों पर किसको कितनी सीट है?


जी हां, यूपी विधानसभी में सदस्यों की संख्या 403 है, जिसमें 402 विधायक राज्यसभा चुनाव के लिए वोट करेंगे,ऐसे में यूपी में सीटों के आधार पर देखें तो बीजेपी और उसकी सहयोगी पार्टी के पास 8 सीटें जाएंगी, तो वहीं अखिलेश यादव के खाते में 1 सीट आएगी, बाकि बची सीटोंं के लिए अखिलेश विपक्ष को देंगे ताकि एक उम्मीदवार विपक्ष का राज्यसभा में जा सके। बता दें कि एक सीट जीतने के लिए यूपी में उम्मीदवार को 38 विधायकों का समर्थन चाहिए, तब जाकर वो राज्सभा जा सकेगा।
समीकरणों के आधार पर अखिलेश सिर्फ एक ही सदस्य को राज्यसभा भेज सकते हैं, जिसकी वजह से उन्होंंने जया का नाम इसलिए आगे बढ़ाया क्योंकि जया किसी गुट में नहीं यानि वो किसी की करीबी नहीं है, इसलिए जया को इसका फायदा मिला। साथ ही जया के एक जाना पहचाना चेहरा है, जिसकी वजह से अखिलेश ने जया को भेजने का फैसला किया।

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