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शिक्षा के मानक से ऊंचा उठकर नर्सिंग शिक्षा को मजबूत करने पर स्वास्थ्य मंत्री ने दिया जोर

दो दिवसीय नरसिंग वर्कशॉप और प्रिंसिपलस मीट के समाप्ति सैशन में की शिरकत
विद्यार्थियों की परीक्षा और मूल्यांकन के हिस्से के तौर पर और ज्यादा पेशेवर क्लीनिकली ड्यूटियों पर दिया ज़ोर
खबर खास, चंडीगढ़ :
पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डा. बलबीर सिंह ने आज जीरकपुर में दो दिवसीय नर्सिग वर्कशाॅप और प्रिंसिपलस मीट के समाप्ति सैशन की अध्यक्षता करते हुये शिक्षा के स्तर को ऊँचा उठा कर नर्सिंग को मज़बूत करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।
नरसिंग पेशे को डाक्टरी पेशे का अहम हिस्सा करार देते हुये उन्होंने कहा कि इंडोर मरीजों के इलाज में डाक्टरों की तरह नर्सों की भी अहम भूमिका होती है। उन्होंने आगे कहा कि क्लीनिकल ड्यूटियां लग्न और जोश के साथ निभाई जानी चाहिए हैं जो कोर्स की परीक्षा और मूल्यांकन का हिस्सा हो सकती हैं।
उन्होंने कहा कि नरसिंग शिक्षा डाक्टरी पेशे की रीढ़ की हड्डी है और ऐसी सैंकड़ों उदाहरणें हैं जहाँ नर्सों ने मुश्किल समय में लोगों को बचाने के लिए अथक मेहनत की।
उन्होंने कहा कि पंजाब में 250 से अधिक नर्सिंग कॉलेज हैं जो हर साल हज़ारों नरसिंग विद्यार्थियों को प्रशिक्षण देते हैं। उन्होंने कहा कि हम पेश चुनौतियों का समाधान करके उनके सैद्धांतिक और प्रैक्टिकल प्रशिक्षण की तरफ ध्यान देना चाहिए। यह दो दिवसीय वर्कशाप मैडीकल शिक्षा और अनुसंधान विभाग, पंजाब के नेतृत्व अधीन पंजाब नर्स रजिस्ट्रेशन कौंसिल ( पीएनआरसी) द्वारा करवाई गई थी।
इस कान्फ़्रेंस का विषय “नर्सिंग नेताओं का सशक्तिकरण- मौजूदा मुद्दे और चुनौतियां“ था। इस वर्कशाप में पंजाब के 23 जिलों के सिविल सर्जनों, डिप्टी मैडीकल कमिशनरों (डीएमसीज़) और नर्सिंग सुपरिडैंटों (मैटरनस) समेत नर्सिंग स्कूलों और कालेजों के लगभग 250 प्रिंसिपलों ने हिस्सा लिया।
इस दौरान प्रमुख गतिविधियों में पंजाब में नर्सिंग विद्यार्थियों के लिए विशेष चुनौतियों के बारे पैनल चर्चा, ज़िला अस्पतालों में विद्यार्थियों के क्लिनीकल प्रशिक्षण-चुनौतियां और समाधान, जीएनएम और एएनएम दाखि़ले 2024-25 के लिए काउंसलिंग और परीक्षाओं में विद्यार्थियों का मूल्यांकन-थ्यूरी और क्लीनिकल शामिल थे।
इस वर्कशाप के दौरान आनलाइन मूल्यांकन प्रणाली और मान्यता के बारे प्रशिक्षण और विचार-विमर्श, प्रेरक लैक्चरः मन की लड़ाई जितना, ज़्यादा सोचने से बचना, भावनात्मक बुद्धि, लोक हुनर, सामर्थ्य को अधिक से अधिक करना, डर और चिंता को कम करना और आंतरिक सफलता ढूँढना, लैक्चरः प्रमाण आधारित नर्सिंग : मिथ्य या हकीकत सम्बन्धी गतिविधियां भी शामिल थीं।

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