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अरविन्द पाण्डेय के दिल के जख्मों उभर कर आए सामने,शिक्षा विभाग में बताई सुधार की ज़रूरत

रिपोर्ट- शमा सलमानी

काशीपुर।दिल के जख्म दबाकर बैठे अरविन्द पाण्डेय,पाण्डेय के दिल में मंत्री न बनने की है टीस,कभी रुतबे और हनक में रहने वाले समर्थकों के घर कर रहे भोज।शिक्षा विभाग में बताये रहे पाण्डेय सुधार की जरुरत,दिल में मंत्री न बनने की टीस भले ही दिल में छुपा रखी हो, लेकिन पांच साल तक मंत्री के जलवे में रहे अरविन्द पाण्डेय जीतने के बाद भी मंत्रिमंडल में जगह न मिलने पर अपने जख्म ना तो किसी को दिखा सकते हैं और ना ही किसी के सामने बयां कर सकते हैं, भले ही इस मिथक को तोड़ने वाले कि शिक्षा मंत्री इस प्रदेश में चुनाव नहीं जीतते पहले शिक्षा मंत्री हैं अरविन्द पाण्डेय जो चुनाव जीते हैं, बावजूद इसके मंत्रिमंडल में से धामी सरकार ने उनको क्यों दूर रखा ये सवाल आज भी यक्ष प्रश्न है, पिर भी दिल के जज्बात कैसे किये अरविन्द पाण्डेय ने बयां और शिक्षा व्यवस्था पर क्या कुछ कहा खास देखिये ये रिपोर्ट।

पूर्व शिक्षा मंत्री और वर्तमान में विधायक गदरपुर अरविन्द पाण्डेय पिछली सरकार में सबसे कद्दावर और महत्वपूर्ण कैबिनेट के सदस्य रहे हैं, जहां त्रिवेंद्र सरकार में उनकी ताजपोशी महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी से हुई, उसके बाद बदले निजाम के हुक्मरानों में तीरथ रावत सरकार में भी अरविन्द पाण्डेय अपने पदों पर बने रहे, इसके बाद पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश की सत्ता सम्भाली, उनके साथ भी पांडेय कैबिनेट के अहम सदस्य रहे, लेकिन विधानसभा चुनावों में जहां अरविन्द पाण्डेय की हार के चर्चे थे, उसको गलत साबित करते हुए अरविन्द पाण्डेय ने गदरपुर सीट से जीत दर्ज भी कर ली, लेकिन उनकी वापसी धामी कैबिनेट में नहीं हो पाई, ऐसे में जहां अरविन्द पाण्डेय के रौबाव पर टीस का जख्म लगा तो उनके समर्थक भी हैरान थे, लेकिन पूर्ण बहुमत से बनी धामी सरकार के खिलाफ बोलने की हिम्मत भी पाण्डेय नहीं जुटा पाये, वहीं अब अपने बयानों में भले ही धामी सरकार के कसीदे पढते हों, लेकिन बातों ही बातों में दिल के जख्मों उभर जाते हैं, भी हनक भरे अंदाज में अरविन्द पाण्डेय ने सत्ता मे रहते हुए जिनका सम्मान तक नहीं किया अब उन्ही समर्थकों के घरों मं जाकर भोजन तक के न्योते पर पाण्डेय पहुँच रहे हैं।