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देसी वैक्‍सीन ने किया कमाल, बंदरों के शरीर से कोरोना वायरस को किया समाप्त

भारत बायोटेक की कोरोना वायरस वैक्‍सीन ‘कोवैक्सिन’ (Coronavirus vaccine Covaxin) जानवरों पर ट्रायल में सफल रही है। कंपनी ने शुक्रवार को ऐलान किया कि Covaxin ने बंदरों में वायरस के प्रति ऐंटीबॉडीज विकसित की। यानी लैब के अलावा जीवित शरीर में भी यह वैक्‍सीन कारगर है, यह साबित हो गया है। कंपनी ने कहा कि बंदरों पर स्‍टडी के नतीजों से वैक्‍सीन की इम्‍युनोजीनिसिटी (प्रतिरक्षाजनकता) का पता चलता है। भारत बायोटेक ने खास तरह के बंदरों (Macaca mulata) को वैक्‍सीन की डोज दी थी। फिलहाल इस वैक्‍सीन का भारत में अलग-अलग जगहों पर फेज 1 क्लिनिकल ट्रायल चल रहा है। सेंट्रल ड्रग्‍स स्‍टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) ने इसी महीने भारत बायोटेक को फेज 2 ट्रायल की अनुमति दी है।

20 बंदरों के बनाए गए थे चार ग्रुप

भारत बायोटेक ने 20 बंदरों को चार समूहों पर बांटकर रिसर्च किया। एक ग्रुप को प्‍लेसीबो दिया गया जबकि बाकी तीन ग्रुप्‍स को तीन अलग-अगल तरह की वैक्‍सीन पहले और 14 दिन के बाद दी गई। दूसरी डोज देने के बाद, सभी बंदरों को SARS-CoV-2 से एक्‍सपोज कराया गया। वैक्‍सीन की पहली डोज दिए जाने के तीसरे हफ्ते से बंदरों में कोविड के प्रति रेस्‍पांस डेवलप होना शुरू हो गया था। वैक्‍सीन पाने वाले किसी भी बंदर में निमोनिया के लक्षण नहीं मिले।

भारत में बनी पहली कोरोना वैक्‍सीन है Covaxin

कोवैक्सिन को इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) – नैशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ वायरलॉजी (NIV) और भारत बायोटेक ने मिलकर डेवलप किया है। भारत बायोटेक ने 29 जून को ऐलान किया था कि उसने वैक्‍सीन तैयार कर ली है।

कोरोना के स्‍ट्रेन से ही बनी है यह वैक्‍सीन

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ICMR-भारत बायोटेक की Covaxin एक ‘इनऐक्टिवेटेड’ वैक्‍सीन है। यह उन कोरोना वायरस के पार्टिकल्‍स से बनी है जिन्‍हें मार दिया गया था ताकि वे इन्फेक्‍ट न कर पाएं। कोविड का यह स्ट्रेन पुणे की NIV लैब में आइसोलेट किया गया था। इसकी डोज से शरीर में वायरस के खिलाफ ऐंटीबॉडीज बनती हैं।

15 जुलाई से शुरू हुआ था ट्रायल

भारत में बनी पहली कोरोना वैक्‍सीन Covaxin का फेज 1 ट्रायल 15 जुलाई 2020 से शुरू हुआ था। देशभर में 17 लोकेशंस पर फेज 1 ट्रायल हुए। Covaxin ट्रायल की सारी डिटेल्‍स ICMR को भेजी जाएंगी। वहीं पर डेटा को एनलाइज किया जा रहा है।

वैक्‍सीन लॉन्‍च होने में कितना वक्‍त?

भारत में कम से कम सात कंपनियां- Bharat Biotech, Zydus Cadila, Serum Institute, Mynvax Panacea Biotec, Indian Immunologicals और Biological E कोरोना वायरस की अलग-अलग वैक्‍सीन पर काम कर रही हैं। सीरम इंस्टिट्यूट ने ऑक्‍सफर्ड वैक्‍सीन का ट्रायल रोक दिया है जबकि बाकी जारी हैं। आमतौर पर वैक्‍सीन डेवलप करने में सालों लगते हैं मगर कोरोना के चलते दुनियाभर के रिसर्चर्स ने युद्धस्‍तर पर काम किया है। कोवैक्सिन के फेज 1 ट्रायल डेटा को ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) के सामने रखना होगा। वहां से फेज 2 ट्रायल की परमिशन मिलेगी जिसमें 750 पार्टिसिपेंट्स होंगे। तीसरी स्‍टेज में हजारों वालंटियर्स शामिल होंगे। भारत बायोटेक को उम्‍मीद है कि उसकी वैक्‍सीन अगले साल की पहली तिमाही तक उपलब्‍ध हो जाएगी।

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