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खूबसूरती के मामले में एक्ट्रेस को भी मात देती है ये इंडियन महिला क्रिकेटर, कभी 13 साल की उम्र में छोड़ा था घर

महिला क्रिकेट टीम में कई ऐसी खिलाड़ी हैं, जो अपने खेल के साथ-साथ काफी खूबसूरत भी हैं. इसमें एक नाम वर्ल्ड कप में भारतीय टीम का हिस्सा रही हरलीन देओल का भी नाम शामिल है. जिन्होंने बीते साल ही इंटरनेशनल स्तर पर अपने क्रिकेट करियर का डेब्यू किया था. आज के समय में सोशल मीडिया पर हरलीन की जबरदस्त फैन फॉलोइंग हैं. कहा जाता है कि हरलीन बेहतरीन मिडिल ऑर्डर बल्लेबाज होने के साथ, बाकी खेलों में भी काफी माहिर हैं. यहां तक कि हरलीन किसी एक्ट्रेस से भी कम नहीं दिखाई देती. यानी की ये कहना गलत नहीं होगा कि एक खिलाड़ी होने के साथ उनके अंदर हर गुण मौजूद है. बता दें कि हाल ही में हरलीन ने भारत की ओर से एक वनडे के साथ 6 टी20 मैच खेले हैं.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हरलीन चंडीगढ से टीम इंडिया में खेलने वाली दूसरी महिला खिलाड़ी हैं. बताया जाता है कि हरलीन जब 8 साल की थी, तभी से ही वो क्रिकेट की बड़ी शौकीन थी और अपने आसपास के लड़कों और भाई के साथ खेला करती थीं. इसके बाद हरलीन 9 साल की थीं, जब उन्होंने स्कूल की तरफ से नेशनल स्तर पर क्रिकेट खेला.Cricketer Harleen Deolइस अचीवमेंट के बाद वो 13 साल की उम्र में क्रिकेट खेलने के लिए घर छोड़कर हिमाचल चली गईं. यहीं से ही हरलीन ने पेशेवर तौर पर क्रिकेट खेलने की शुरूआत की.

आपको बता दें कि खेल के साथ हरलीन पढ़ाई के मामले में भी काफी अव्वल दर्ज की रही हैं. जानकारी के मुताबिक 10वीं और 12वीं में उनके 80% नंबर थे. इतना ही नहीं हरलीन बहुत अच्छी एक्टर भी हैं. इस समय वे सिर्फ 22 साल की हैं. खिलाड़ी क्रिकेट के अलावा हरलीन की दिलचस्पी हॉकी, फुटबॉल, बास्केटबॉल में भी है. और तो और वो स्कूल में जब पढ़ाई कर रही थीं तब बेस्ट एथलीट भी रही थीं.

कहा जाता है कि जब हरलीन आसपास के लोगों के साथ क्रिकेट खेलती थीं, तो पड़ोसी इस बात की शिकायत उनके परिवार वालों से करते थे कि अब लड़की बड़ी हो रही है और ऐसे में काफी बड़े-बड़े लड़कों के साथ वो खेलती है. लेकिन अच्छी बात तो ये थी कि उस समय पड़ोसियों की बातों पर न कभी हरलीन ने ध्यान दिया और न ही उनके अभिभावक ने गौर किया. नतीजा ये कि आज हरलीन टीम इंडिया में अपनी जगह बना चुकी हैं.

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बेटी के खेल के बारे में बात करते हुए हरलीन की मां ने एक इंटरव्यू में बताया था कि क्रिकेट खेलने के समय में उनकी बेटी ने कभी उन्हें किसी तरह से परेशान नहीं किया. अपने खेल को लेकर हरलीन काफी गंभीर थीं. वो खुद ही सुबह उठती थीं.

खुद ही कोचिंग के लिए टेबल पर चढ़कर दरवाजा खोल लेती थी. चोट लगने पर खुद ही मरहम भी लगा लेती थीं. हरलीन का क्रिकेट के लिए यही जुनून था जिसने उन्हें इस मुकाम पर पहुंचाया है.

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