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चीन को सबक सिखाने के लिए अमेरिका का बड़ा ऐलान, अब नहीं बख्शा जाएगा ड्रैगन

कोरोना की आड़ में अपने नापाक मंबूसों को धरातल पर उतारने पर अमादा हो चुके चीन को सबक सिखाने के लिए अब अमेरिका ने बड़ा ऐलान किया है। अमेरिका के इस कदम से साफ जाहिर होता है उसने भारत के साथ युद्ध मैदान में उतरकर चीन के खिलाफ मोर्चा खोल देने का ऐलान कर दिया है। एक तरफ जहां भारत का दो टूक कहना है कि अ्ब चीन बख्शा नहीं जाएगा तो वहीं दूसरी तरफ अमेरिका के इस कदम से भी चीन के होश फाख्ता हो चुके हैं। कोरोना काल की शुरूआत से ही चीन के खिलाफ मोर्चा खोल चुके अमेरिका ने अब चीन को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दे दी है।

अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा कि चीन एशिया में एक बड़े खतरे का रूप धारण कर चुका है। ऐसी स्थिति में हम अपने सैनिकों को एशिया में तैनात करने जा रहे है। अभी बीते दिनों ही जर्मनी में 50 हजार सैनिकों में से 25 हजार सैनिकों को वहां से रवाना कर एशिया में तैनात कर दिया गया है, ताकि गंभीर खतरे का रूप धारण करने जा रहे चीन के हिंसक रूख पर अंकुश लगया जा सके। मालूम हो कि बीते दिनों ही अमेरिकी विदेश मंत्री ने साफ कर दिया है कि अब सैनिकों की तैनाती को एशिया में बढ़ाया जाएगा। अभी जब अमरेिका युरोपीय देशों से अपने सैनिकों को रवाना कर रहा था तो यूरोपीय यूनियन ने भी अमेरिका से सवाल किया था, जिस पर अमेरिका ने जवाब देतेे हुए कहा था कि चीन के आगामी खतरे से निपटने के लिए यह कदम उठाया गया है।

बता दें कि अमेरिका के इस कदम से भारत को वर्तमान में चीन की घेराबंदी करने में काफी सहयोग मिलेगा। इतना ही नहीं, पोम्पियो ने तो साफ कह दिया है कि यदि स्थिति ऐसी बन गई तो अमेरिकी सैनिकों को पीपल्स आर्मी से भिड़ने में कोई हिचक नहीं होगी। यह साफ होता है कि विदेश मंत्री के इस बयान को हल्के में नहीं लेना चाहिए। वहीं बीते दिनों रूस दौरे पर गए रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने भी साफ कर दिया हैं अब भारत वार्ता नहीं अपितु मुहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार है।

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सक्षम है अमेरिका

यहां पर हम आपको बताते चले कि अमेरिकी विदेशी मंत्री के इस बयान की गंभीरता का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि अमेरिका ने पहले ही ताइवान के करीब अपने तीन न्यूक्लियर एयरक्राफ्ट कैरियर को तैनात कर दिया है। जिसमें से दो ताइवान और बाकी मित्र देशों के साथ युद्धाभ्यास कर रहे हैं। वहीं तीसरा एयरक्राफ्ट जापान में युद्धाभ्यास कर रहा है। इससे  पहले भी अमेरिका ने प्रशांत महासागर में चीन की दादागिरी पर अंकुश लगाने के लिए  यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट, यूएसएस निमित्ज और यूएसएस रोनाल्ड रीगन को प्रशांत महासागर में तैनात किया था। एक आंकड़े के मुताबिक अभी तक 2 लाख सेे भी अधिक सैनिकों को एशिया में तैनात किया जा चुका है।

अमेरिका के 800 से भी ज्यादा सैन्य ठिकाने हैं। लेकिन चीन की घेराबंदी के लिए मालदीव में डियेगो गार्सिया में अमेरिकी और ब्रिटिश नौसेना का बेस मौजूद है। वहीं सिंगापुर, ताइवान, दक्षिण कोरिया, गुआम और जापान में भी अमेरिका के सैन्य ठिकाने हैं। जापान सैन्य ठिकाने से अमेरिका दक्षिण चीन सागर पर नजर रखा हुआ है।

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