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पीएम की सर्वदलीय बैठक से पहले विपक्ष के तीखे सवाल, 17 राजनीतिक पार्टियों में ‘AAP’ बाहर

सोमवार को हुआ भारत-चीन विवाद का खूनी दंगल अब राजनीति का एक नया मुद्दा बन गया है. दरअसल हाल ही में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार पर शहीद हुए जवानों को लेकर अपना निशाना साधा था, जिसमें राहुल गांधी वीडियो के माध्यम से केंद्र सरकार को LAC पर चल रहे विवाद की सच्चाई बखान करने की बात कह रहे थे. इस बयान को लेकर भाजपा की तरफ से पलटवार करते हुए कहा गया कि राहुल गांधी को कुछ पढ़ना चाहिए. चूंकि जब भारत-चीन 1993 में शांति समझौता हुआ था. उस समय के भूतपूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव ने चीन का दौरा करते समय दोनों पक्षों में सीमा शांति के एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। भारत और चीन के बीच आपसी सीमा विवाद को निपटाने के लिए 1993 में हुई संधि में यह तय हुआ कि दोनों देशों की सेनाएं सीमा पर गश्त के दौरान हथियार का इस्तेमाल नहीं करेंगी. जबकि राहुल गांधी बार-बार यह कह रहे हैं कि सेना को हथियार लेकर भेजना चाहिए था. हालांकि इस बात का किसी को अंदेशा नहीं था कि चीन की तरफ से अचानक हमला शुरू हो सकता है. इसमें दोनों देशों की सेनाओं को नुकसान पहुंचा. बता दें कि इस आपसी झड़प में भारत के 20 जवान शहीद हुए थे. जबकि चीन के 40 जवान मारे गए. इस घटना के बाद से देश के भीतर भी एक नई आग उबल रही है. हर कोई चीन से खफा है इसलिए हर नागरिक आज चीनी समान का बहिष्कार करने में तुला है. लेकिन इस बीच राहुल गांधी का जो बयान सामने आया है उस पर देश की सियासत में एक नया मोड़ सामने आ गया है.

राहुल गांधी के इस बयान को भाजपा ने बेतुका करार दिया है. साथ ही यह नसीहत दी है कि राहुल गांधी बिना पढ़े किसी मसले में न पड़ें. बहरहाल पिछले दो महीने से चला आ रहा लद्दाख सीमा विवाद को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज यानि कि शुक्रवार शाम को सर्वदलीय बैठक बुलाने जा रहे हैं. माना जा रहा है कि इस बैठक में पीएम मोदी चीन को मूंहतोड़ जवाब देने के लिए नई रणनीति तैयार कर सकते हैं. हालांकि इससे पहले भी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि चीन ने बातचीत के सारे रास्ते बंद कर दिए हैं, जबसे चीन का दोगलापन सामने आया है तभी से ही भारत ने सीमा पर जवानों की संख्या में इजाफा कर दिया है. सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में देश की करीब 17 राजनीतिक पार्टियों के नेता शामिल होंगे. हालांकि केंद्र की सर्वदलीय बैठक से पहले विपक्ष ने मोदी सरकार पर कई सवाल दागना शुरू कर दिया है. बताया जा रहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी इस बैठक में पार्टी की ओर से तीखे सवाल कर सकती हैं. वहीं सरकार से मौजूदा हालात पर तथ्य मांग सकती हैं.

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एक तरफ कांग्रेस पार्टी सरकार को घेरने पर विचार कर रही है तो दूसरी ओर आम आदमी पार्टी भी सरकार पर हमलावर है. दरअसल, आम आदमी पार्टी को इस बैठक के लिए न्योता नहीं मिला है. दरअसल, सरकार की ओर से इस बैठक के लिए कुल 17 राजनीतिक दलों को न्योता दिया गया है. इनके प्रमुखों से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी बात की है. बैठक में पार्टियों को बुलाने के लिए सरकार ने एक आधार तय किया था.

किस आधार पर लोगों को बुलाया गया?

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• मुख्य राष्ट्रीय राजनीतिक दल

• जिन पार्टियों के लोकसभा में पांच सांसद हों

• नॉर्थ ईस्ट के मुख्य दल

• जिन पार्टियों की केंद्रीय कैबिनेट में हिस्सेदारी हो

बैठक में न बुलाए जाने से नाराज आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने केंद्र पर हमला बोला है कि क्या हमारी राय सरकार को नहीं चाहिए, लेकिन हम ये सुनना चाहेंगे कि प्रधानमंत्री क्या कहते हैं?. सिर्फ आम आदमी पार्टी ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय जनता दल को भी नहीं बुलाया गया है. ऐसे में भारत-चीन विवाद का लावा अब देश के अंदर ही फूटने लगा है. इस विवाद ने देश में एक नई राजनीति को जन्म दे दिया है.

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