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भारत-चीन सीमा विवाद पर विदेश मंत्रालय का बड़ा बयान- शांति से समस्या सुलझाने को दोनों देश सहमत

पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन सीमा पर वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास विवाद सुलझता दिख रहा है। बता दें कि भारत-चीन के बीच बॉर्डर पर एक महीने से चल रहे गतिरोध को लेकर विदेश मंत्रालय ने बड़ा बयान देते हुए बताया कि दोनों देश सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति से हल करने के लिए सहमत हुए हैं। शनिवार को उच्चस्तरीय सैन्य स्‍तर की बातचीत के बाद र‍व‍ि‍वार को विदेश मंत्रालय का यह बयान आया है। अब चीन शांति से पूरे विवाद को सुलझाने के लिए तैयार है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा कि दोनों पक्ष ‘द्विपक्षीय समझौतों के मुताबिक सीमाई इलाकों में स्थिति के शांतिपूर्ण समाधान पर सहमत’ हैं। MEA के मुताबिक, दोनों देशों के बीच मिलिट्री कमांडर लेवल की बातचीत बेहद शांतिपूर्ण और गर्मजोशी से भरे माहौल में हुई। यह वार्ता चुशुल-मोल्डो क्षेत्र में हुई थी। चीन ने लाइन ऑफ एक्‍चुअल कंट्रोल (LAC) पर पिछले कुछ हफ्तों से आक्रामक रुख अपनाया हुआ था। कई दौर की बातचीत अबतक बेनतीजा रही थी।

विदेश मंत्रालय का बड़ा बयान, सीमावर्ती क्षेत्रों में विवाद शांति से हल करने के लिए भारत-चीन सहमत हुए

एक छोटा बयान जारी करते हुए MEA ने कहा कि दोनों देशों के मिलिट्री कमांडर्स इस बात पर सहमत हुए कि पूर्वी लद्दाख में जारी सीमा विवाद का हल शांतिपूर्वक, द्विपक्षीय समझौतों के आधार पर निकाला जाएगा। द्विपक्षीय संबंधों के सम्‍पूर्ण विकास के लिए भारत-चीन सीमा क्षेत्र में शांति आवश्‍यक है। मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्षों ने डिप्‍लोमेटिक संबंधों की 70वीं वर्षगांठ को भी याद किया। दोनों देश इस बात पर सहमत हुए कि मसले का जल्‍द हल निकलने से रिश्‍ते आगे बढ़ेंगे।

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विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि चीन से मिलिट्री और डिप्‍लोमेटिक लेवल पर बातचीत चलती रहेगी। लद्दाख में सीमा पर दोनों देशों की ओर से भारी संख्‍या में सैनिक जुटे हुए हैं। उन्‍हें वापस बुलाने पर कोई फैसला हुआ है या नहीं, इसपर विदेश मंत्रालय ने कुछ नहीं कहा।

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माना यही जा रहा है कि अगले दौर की बातचीत में तनाव कम करने की एक रूपरेखा तैयार हो सकती है। शनिवार को दोनों देशों की तरफ से हुई लेफ्टिनेंट जनरल लेवल की बातचीत से पहले स्थानीय कमांडरों के स्तर पर दोनों सेनाओं के बीच 12 राउंड बातचीत हो चुकी थी। इसके अलावा 3 बार मेजर जनरल लेवल पर भी बातचीत हो चुकी थी। कई दौर की बातचीत में कोई हल नहीं निकलने के बाद इतने बड़े स्तर पर बातचीत का फैसला हुआ।

भारत-चीन सीमा विवाद पर विदेश मंत्रालय का बयान- दोनों देश शांतिपूर्ण ढंग से समस्या सुलझाने को राजी

दोनों देशों के बीच पिछले महीने गतिरोध की शुरुआत हुई थी। पूर्वी लद्दाख में 5 और 6 मई को दोनों देशों के करीब 250 सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। 9 मई को उत्तरी सिक्किम में भी इसी तरह की घटना हुई थी। चीन के सैनिकों ने लद्दाख में कई पॉइंट्स पर आक्रामक रुख अपनाया जिसका जवाब भारत को देना पड़ा। फिर भारत ने फैसला किया कि पैंगोंग सो, गलवान वैली, डेमचोक और दौलत बेग ओल्डी जैसे सभी विवादित जगहों पर चीन की आक्रामकता से निपटने के लिए भारतीय सैनिक मजबूत रुख अपनाएंगे। सैटलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि चीन ने एलएसी से सटे इलाकों में बड़े पैमाने पर डिफेंस इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ाया है।

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