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कोरोना वायरस संक्रमित सवा दो लाख से ऊपर, मौत का आंकड़ा जानकर चौक जायेंगे आप

नई दिल्ली। देशभर में कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों की संख्या गुरुवार को बढ़कर 2 लाख 26 हजार 494 हो गई। गुरुवार को कोरोनावायरस संक्रमण के 9,770 मामले रात 10 बजे तक सामने आए। पिछले 4 दिन का ट्रेंड बता रहा है कि भारत में अब नए मरीजों की संख्या जिस तेजी से बढ़ रही है, उसके अनुपात में ठीक होने वालों की संख्या आधे से भी कम है। नए मरीजों की संख्या में सर्वाधिक वृद्धि महाराष्ट्र, तमिलनाडु, दिल्ली और गुजरात जैसे राज्यों से हो रही है। किंतु उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, जम्मू कश्मीर, त्रिपुरा, राजस्थान, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, असम, और बिहार जैसे राज्यों से भी संक्रमण के नए मरीज बड़ी संख्या में मिल रहे हैं।

गुरुवार को राजस्थान और मध्यप्रदेश दो ऐसे राज्य थे जहां नए संक्रमित मरीजों के मुकाबले ठीक होने वाले मरीजों की संख्या अधिक थी। राजस्थान में कोरोनावायरस संक्रमित 205 नए मरीज मिले किंतु 360 मरीज ठीक भी हुए। इसी प्रकार मध्यप्रदेश में 174 नए मामले सामने आए किंतु 192 मरीज ठीक हो कर घर लौटे। गुजरात में 492 नए मामले मिले और 455 मरीज ठीक होकर घर लौटे। बाकी राज्यों में रिकवरी गुरुवार को उतनी संतोषप्रद नहीं रही। महाराष्ट्र में गुरुवार को 2933 नए मरीज मिले और 1352 मरीज ठीक हुए। यहां 123 लोगों की मौत भी हुई। देशभर में कोरोनावायरस से अब तक 6362 लोगों की मौत हो चुकी है।

हालांकि 1,08,347 मरीज अब तक ठीक हो चुके हैं। महाराष्ट्र, तमिलनाडु, दिल्ली और गुजरात के अलावा देश के कई राज्यों में कोरोनावायरस तेजी से फैल रहा है। त्रिपुरा जैसे छोटे राज्यों में एक दिन में ही 201 मरीजों का मिलना इस बात का संकेत है कि कोरोनावायरस देश के पूर्वोत्तर में भी तेजी से फैल रहा है। असम में भी गुरुवार को 158 मरीज मिले और पीड़ितों की संख्या बढ़कर 1989 हो गई। यहां रिकवरी अपेक्षाकृत कम है। हालांकि केवल 4 लोगों की जान गई है। छोटे राज्य में गोवा का भी आंकड़ा चिंताजनक है।

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यहां गुरुवार को 40 मरीज मिले और पीड़ितों की संख्या बढ़कर 166 हो गई। नागालैंड में 22 मरीज मिलने के साथ पीड़ितों की संख्या बढ़कर 80 हो गई। छत्तीसगढ़ में 52 मरीज मिले और पीड़ितों की संख्या बढ़कर 678 हो गई। इन राज्यों में इतनी बड़ी तादाद में मरीज मिलने का कारण प्रवासी श्रमिक हैं, जो लगातार राज्य वापस लौट रहे हैं अथवा बड़ी संख्या में लौट चुके हैं। इसे देखकर कहा जा रहा है कि कोरोना का विस्फोट 15 जून के बाद चरम सीमा पर होगा। चिंता इस बात की है कि संक्रमण बढ़ने के साथ ही देश में अनेक हिस्सों में लॉक डाउन को अनलॉक कर दिया गया है। ऐसी स्थिति में बड़ी तादाद में मरीज उन क्षेत्रों से भी मिल रहे हैं जो पहले ग्रीन क्षेत्र कहे जाते थे।

स्वास्थ्य मंत्रालय देश में मृत्यु दर के आंकड़े देकर और प्रति दस लाख पर सबसे कम संक्रमण का दावा करके स्थिति की भयावहता को नकारने की कोशिश कर रहा है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इस रफ्तार से बढ़ता रहा तो कोरोना जल्द ही 10 लाख लोगों तक पहुंच जाएगा और हम अमेरिका जैसे देशों के मुकाबले में होंगे जहां कोरोनावायरस संक्रमण के मरीज 20 लाख के करीब पहुंचने वाले हैं।

इतनी बड़ी तादाद में मरीजों का बढ़ना और उसके साथ स्वास्थ्य से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता सरकार के लिए लगातार बड़ी चुनौती बन कर खड़ी हो गई है। जब शुरुआत हुई थी उस वक्त कोरोना के हर मरीज को अस्पताल में भर्ती किया जाता था। लेकिन आज बड़ी संख्या में मरीजों को कम लक्षण दिखने पर घर के भीतर ही क्वॉरेंटाइन किया जा रहा है। सरकार अस्पताल के बेड और अन्य सुविधाएं गंभीर मरीजों के लिए ही आरक्षित रखना चाहती है। इससे पता चलता है कि आगामी समय में कोरोनावायरस की स्थिति गंभीर होने पर सरकार के समक्ष बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा।

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