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राहुल-प्रियंका ने PM मोदी और योगी पर लगाया आरोप, कहा- कोरोना पर धीमी रफ्तार से चल रहा काम

एक बार फिर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने कोरोना टेस्ट की धीमी रफ्तार पर सवाल उठाए हैं. मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए राहुल गांधी ने कहा कि भारत ने कोरोना टेस्ट किटों की खरीद में देरी की. वहीं, प्रियंका ने योगी सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि यूपी में जांच का सिस्टम अभी भी बहुत लचर है.

राहुल गांधी ने मंगलवार को कहा, ‘भारत ने कोरोना टेस्ट किटों की खरीद में देरी

की और अब भी यह काफी कम मात्रा में नहीं है. प्रति मिलियन भारतीयों पर सिर्फ 149 टेस्ट के साथ हम अब लाओस (157), नाइजर (182) और होंडुरास (162) देशों की कतार में हैं. अधिक से अधिक संख्या में टेस्ट के जरिए ही वायरस से लड़ा जा सकता है. वर्तमान में हम इस खेल में कहीं नहीं हैं.’

वहीं, प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि मैंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर टेस्टिंग बढ़ाने का आग्रह किया था. यूपी में होने वाली मौतों में 5 की कोरोना टेस्ट रिपोर्ट मौत के बाद आई है. जांच का सिस्टम अभी भी बहुत लचर है. जांच की व्यवस्था को तेज व व्यवस्थित करिए.

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इससे पहले कांग्रेस ने मोदी सरकार से सवाल पूछते हुए कहा था कि कोरोना की रोकथाम का एक मात्र रास्ता है टेस्टिंग. 1 फरवरी से 13 अप्रैल, 2020 तक, यानी 72 दिनों में देश में केवल 2,17,554 कोरोना टेस्ट हुए. औसत 3,021 टेस्ट प्रतिदिन है, टेस्ट कई गुना बढ़ाने की क्या योजना है? इसके अलावा कांग्रेस की ओर से 6 और सवाल पूछे गए हैं.

10 अप्रैल को प्रियंका गांधी वाड्रा ने सीएम योगी आदित्यनाथ को चिट्ठी लिखी थी. उन्होंने कहा था कि उत्तर प्रदेश में आबादी ज्यादा है, ऐसे में यहां पर कोरोना के लिए टेस्टिंग की संख्या बढ़ाए जाने की जरूरत है. अभी 23 करोड़ की जनसंख्या वाले प्रदेश में सिर्फ 7 हजार टेस्ट हुए हैं. इसे बढ़ाया जाए.

प्रियंका ने कहा था कि प्रदेश में युद्ध स्तर पर मास्क और सैनिटाइजर बांटे जाएं, लोगों को बताया जाए कि ये कहां पर मिलेंगे. इसके साथ ही प्रदेश में राजस्थान के भीलवाड़ा मॉडल को अपनाने की अपील की गई थी.

पिछले दिनों ही कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में राहुल गांधी ने कहा था कि केंद्र सरकार ने कम टेस्ट की तकनीक को अपनाकर भारी गलती की है. ऐसे में कांग्रेस शासित राज्यों में टेस्ट को बढ़ाया जाना चाहिए. उन्होंने कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए भीलवाड़ा मॉडल का उदाहरण दिया था, जहां सामूहिक रूप से सभी के परीक्षण पर जोर दिया था.

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