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लड़की के गर्भ से पैदा हुआ सांप, जान से मारने की कोशिश में हुआ ये चमत्कार

एक औरत ही इंसान को जन्म देती है और अपनी पड़ी को आगे बढ़ते है लेकिन क्या अपने इंसान के शरीर से किसी सांप को पैदा होते देखा या सुना है, वो भी तब जब वो जहरीला जानवर कोई और नहीं बल्कि जंप हो। हैरान कर देने वाली ये कहानी काल्पनिक नही है ये हकीकत है। एक इंसान सांप को जन्म दे और फिर जब उसे कोई मारना चाहे तो सांप वहां नजर ना आए, क्या यह संभव लगता है? शायद आप कहेंगे नहीं लेकिन यही बात जब आप हिमालय के मंडी जिले में स्थित देव पशाकोट के आस-पास के लोगों से पूछेंगे तो उसका जवाब सुनकर आपके पैरों तले जमीन खिसक जाएगी, क्योंकि उनका जवाब होगा जी हां ऐसा ही हुआ है।

देव पशाकोट चौहार घाटी के मुख्‍य देवता हैं। देव पशाकोट मंदिर के निर्माण में सामान्‍य मंदिरों के निर्माण समय से भी अधिक समय लगा था। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस मंदिर का निर्माण करने के लिए पशाकोट देव का का आदेश था कि खाली पेट ही निर्माण कार्य हो। भोजन करने के बाद मंदिर का निर्माण करने की सख्‍त मनाही थी। यही वजह थी कारीगरों को सामान्‍य से अधिक समय लगा। मंदिर का निर्माण काष्‍ठ कुणी शैली में किया गया है। जो कि इसे और भी अलौकिक बना देता है। देव पशाकोट मंदिर लोहारड़ी से तकरीबन 15 किलोमीटर की दूरी पर मराड़ नाम के स्‍थान पर स्‍थापित है।

पौराणिक कथा के अनुसार बहुत सालों पहले एक चरवाहे की बेटी पशुओं को चराने के लिए मराड़ जाती थी। वहां एक सरोवर था। जब वह थक जाती तो सरोवर के पास बैठ जाती। प्‍यास लगती तो उसी सरोवर का जल पी लेती। लेकिन हर रोज उसे एक आवाज ‘गिर जाऊं’ ‘गिर जाऊं’ सुनाई देती। उसे कुछ समझ ही नहीं आता। फिर आवाज को वहम मानकर घर वापस चली जाती। चरवाहे की बेटी दिन-ब-दिन कमजोर होती जा रही थी। एक दिन उसकी मां ने पूछा कि आखिर क्‍या हुआ है जो वह दिन प्रीतिदिन कमजोर होती जा रही है। तब उसने सरोवर के जल की घटना अपनी माँ को सुनाई। इसपर उसकी मां ने कहा कि जब इस बार उसे ‘गिर जाऊं’ ‘गिर जाऊं’ की आवाज सुनाई दे तब वह कह दे कि गिर जाओ।

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दूसरे दिन जब वह फिर सरोवर के पास गई और पानी पीने लगी तो फिर से वही आवाज सुनाई दी। तब उसने मां के कहे अनुसार कहा गिर जाओ। कथा के अनुसार जब उस लड़की ने कहा कि गिर जाओ तो नदी किनारे स्थि‍त पहाड़ तुरंत ही गिर गया। इसके बाद जमकर बारिश हुई और वह लड़की वहां से गायब हो गई और पानी में बहती हुई टिकन आ पहुंची। वर्तमान में इसी स्‍थान पर पशाकोट देवता का मंदिर है। कहते हैं कि पशाकोट देव ने उस लड़की से विवाह कर लिया। काफी वक्‍त बीत गया तो वह अपने मायके मराड़ गई। जहां पर उसे सांपों को जन्‍म दिया। यह देखकर तो उसकी मां अचंभित रह गई और सांपों को मारने का प्रयास किया। लेकिन तभी लड़की और सांप सभी गायब होकर टिकन पहुंच गए।

यही सांप महानाग, अजियापाल और ब्रह्मा देव के नाम से प्रस‍िद्ध हुए। ऐसी मान्‍यता है कि जिस तरह चरवाहे की बेटी गर्भावस्‍था के दौरान अपनी खुशी बांटने मायके गई थी। ठीक उसी तरह पशाकोट देव आज भी हर तीन साल पर सांप के रूप में मराड़ जाते हैं। ऐसा कहा जाता है कि वह उसी नदी से होते हुए जाते हैं जहां पर उस चरवाहे की बेटी पानी पीती थी। मान्‍यता है जब भी वह मराड़ जाते हैं तो नदी के आस-पास लोगों को ढोल-नगाड़ों की आवाजें सुनाई देती हैं। कहते हैं कि पशाकोट देवता की इस यात्रा में शामिल होने वाले भक्‍तों की झोली कभी भी खाली नहीं रहती। आज भी जब यह यात्रा मराड़ पहुंचती है तो उस फटे हुए पत्‍थर में सांप ही सांप दिखाई देते हैं। वहीं जब यह यात्रा वापस टिकन आती है तो श्रद्धालुओं को सांप के रूप में पशाकोट देवता के दर्शन होते हैं।

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