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राम मंदिर पर ट्रस्ट बनाने की प्रक्रिया पूरी, 26 जनवरी के बाद घोषणा

केंद्र सरकार ने राम मंदिर से जुड़े ट्रस्ट को बनाने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। इस सिलसिले में बातचीत पूरी हो चुकी है। ट्रस्ट में राम मंदिर आंदोलन से जुड़े लोगों की संख्या ज्यादा होने की उम्मीद है। इस बाबत घोषणा 26 जनवरी के बाद होने की संभावना है। सूत्रों ने इस बात की जानकारी दी। सरकारी सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट में 11 से 15 सदस्य होंगे, जिनमें से कोई भी राजनीतिक नेता नहीं होगा। ट्रस्ट में ना तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का और ना ही संघ परिवार का कोई भी सदस्य सीधे तौर पर शामिल होगा। इसके संरक्षक मंडल में प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, उत्तर प्रदेश के राज्यपाल और सूबे के मुख्यमंत्री शामिल हो सकते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार के एक और गृह मंत्रालय के एक अधिकारी भी इसका हिस्सा हो सकते हैं।

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सूत्रों की माने तो यह भी तय किया गया है कि राम मंदिर का प्रारूप विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के मॉडल की तरह ही होगा। यानी मंदिर विहिप के मॉडल की तर्ज पर बनेगा। ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास हो सकते हैं, जबकि विश्व हिंदू परिषद के उपाध्यक्ष चंपत राय को महत्वपूर्ण पद दिए जाने की उम्मीद है। वर्तमान में महंत नृत्य गोपाल दास श्रीराम जन्म भूमि न्यास के अध्यक्ष हैं। उनके अलावा कर्नाटक के पेजावर मठ के स्वामी भी ट्रस्ट में शामिल किए जा सकते हैं। यह भी कहा जा रहा है कि ट्रस्ट में अयोध्या से आने वाले संतों की संख्या अधिक देखने को मिलेगी। निर्मोही अखाड़ा और रामानुज संप्रदाय के प्रतिनिधि को भी शामिल किया जा सकता है। गोरक्षनाथ पीठ गोरखपुर के प्रतिनिधि को भी शामिल करने की बात पता चली है।

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ट्रस्ट के अलावा मंदिर निर्माण को लेकर भी एक कमेटी बनाई जा रही है। इसमें ट्रस्ट में शामिल सदस्यों के अलावा विश्व हिंदू परिषद के लोग शामिल होंगे। कमेटी में कुछ विशेषज्ञ को भी रखा जा सकता है। गौरलतब है कि सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने 9 नवंबर 2019 को ऐतिहासिक फैसले में राम मंदिर के पक्ष में अपना फैसला सुनाया था।

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