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स्त्रियों के लिए सबसे सुरक्षित निकला भारत का ये छोटा सा राज्य, बड़े-बड़े राज्यों को दे दी मात, जानिए खूबियाँ

नई दिल्ली : राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो ने आखिरकार 2 साल की देरी के बाद साल 2017 के अपराध से जुड़े आंकड़ें जारी कर दिए हैं। एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक देशभर में महिलाओं के साथ हो रही हिंसा में काफी वृद्धि हुई है। इन आकड़ों में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, राजस्थान कुछ ऐसे राज्य हैं जहां महिलाओं के साथ सबसे ज्यादा हिंसा हुई है।

पति द्वारा किए गए हैं सबसे ज्यादा अपराध

एनसीआरबी ने रिपोर्ट तैयार करने के लिए 1 जनवरी 2017 से लेकर दिसंबर 2017 के बीच के आंकड़ें जुटाए हैं। इन आंकड़ों को जुटाने में राज्य और केंद्रीय सरकार की एजेंसियों की मदद ली गई है। इसमें सबसे चौकाने वाली बात जो सामने आई है वो यह कि महिलाओं के साथ हुए ज्यादातर अपराध उनके पति द्वारा ही किए गए हैं। इनमें बदसलूकी के मामले सबसे अधिक हैं। ऐसे मामलों की संख्या 33.2 फीसदी है। वहीं महिलाओं के अपहरण के मामले 21 फीसदी हैं और बलात्कार के मामले 10 प्रतिशत।

2016 के बाद आंकड़ों में हुई है बढ़ोत्तरी

इन आंकड़ों को देखें तो 2016 के आंकड़ों के मुकाबले 2017 में रजिस्टर हुए मामलों की संख्या में 3.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। 2017 में हुए सभी अपराधों में आईपीसी के तहत दर्ज हुए अपराधों की संख्या कुल अपराधों की 61 फीसदी है और एसएलएल के तहत 38.8 प्रतिशत है। आईपीसी के तहत दर्ज हुए मामलों में 2016 के मुताबिक 2.9 प्रतिशत और एसएलएल के तहत 4.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

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नागालैंड में हुई सबसे कम हिंसा

अब बात करते हैं नागालैंड की, तो नागालैंड देश का ऐसा राज्य है जहां महिलाओं के साथ सबसे कम अपराध हुए हैं। 2017 में महिलाओं के साथ हुए अपराध की यहां संख्या केवल 79 है। सभी पूर्वोतर राज्यों के आंकड़ों को देखकर पता चलता है कि देश के बाकी सभी राज्यों की तुलना में पूर्वोतर राज्यों में महिलाओं के साथ हिंसा कम होती है। महिलाओं के साथ हो रहे अपराधों की दर पर नजर डालें तो पूर्वोत्तर राज्य असम में सबस तेजी से अपराध हो रहे हैं। महिलाओं के साथ हो रहे अपराधों की असम में दर 143 है।

इस तरह तैयार होती है रिपोर्ट

इस रिपोर्ट को तैयार करते हुए एनसीआरबी ने जो आंकड़ें जुटाए हैं वो सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से मिले आंकड़ों के आधार पर हैं। जनसंख्या का सोर्स रजिस्टर जनरल ऑफ इंडिया द्वारा 2001 की जनसंख्या गणना को आधार बनाकर किया गया है। आपको बता दें कि एनसीआरबी भारत सरकार द्वारा चलाई जाने वाली एजेंसी है जो आईपीसी और एसएलएल के तहत परिभाषित अपराधों के आंकड़ों का विश्लेषण कर उसे जारी करती है। एनसीआरबी गृह मंत्रालय के अंतर्गत काम करती है।

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