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जानें कब है कृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी, किस शुभ मुहूर्त में करें कान्हा की पूजा

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भादो मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि को भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। अष्टमी को ही यह पर्व मनाया जाता है, यदि रोहिणी का संयोग मिल जाय तो और शुभ है।

इस दिन कृष्‍ण जी के भक्‍त सारा दिन श्रद्धा पूर्वक व्रत रह कर कृष्‍ण जन्‍म के बाद अपना व्रत खोलते हैं। ज्‍यादातर देखा जाता है कि कृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी दो अलग अलग दिन पर होती है। इस दिन मंदिरों में भक्‍तों का तांता लगा रहता है। कृष्ण जन्माष्टमी दिनांक 24 अगस्त दिन शनिवार को है।

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कृष्ण जन्माष्टमी शुभ मुहूर्त
पूजा का शुभ मुहूर्त- दोपहर 12 बजे से रात 12 बजकर 47 मिनट तक
पारण- 25 अगस्त को प्रातः 06 बजे तक

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व्रत की विधि-
यह व्रत अष्टमी तिथि को शुरू होता है। प्रातःस्नान इत्यादि के बाद घर के मंदिर को साफ सुथरा करके बाल कृष्ण लड्डू गोपाल जी की मूर्ति मंदिर में रखे । माता देवकी संग मूर्ति भी रखें। देवकी,वासुदेव, बलदेव, नंद, यशोदा जी का चित्र लगाएं एकदम वैसा ही जैसे उस समय भगवान का जन्म हुआ था।अब सबकी विधिवत पूजा करें। रात्रि 12 बजे भगवान का जन्म कराएं। भगवान के गीत गाये। सोहर गायें।पुष्प भगवान बाल कृष्ण पर बरसाते रहें। इत्र तथा गंगा जल से पहले ही कृष्ण को स्नान कराके सुंदर नवीन वस्त्र पहनाएं। आभूषण भी पहना सकते हैं। भगवान कीर्तन तथा नृत्य से प्रसन्न होते हैं।उनके सामने मधुर भजन गायें व नृत्य करें। 12 बजे जन्म कराके गीत संगीत के बाद प्रसाद का वितरण करें।

व्रत का पारण-
दिनांक 25 अगस्त को प्रातः 06 बजे तक पारण अवश्य कर लें।

जन्माष्टमी को अपने मन की मनोकामनाएं बाल कृष्ण भगवान से मांग कर अपने जीवन को धन्य करें-
इस महाव्रत के दिन भगवान कृष्ण को भजन तथा नृत्य से प्रसन्न करें। अपने मन की मुरादें भगवान से मांग सकते हैं। आज बाल कृष्ण आप की सेवा तथा भजन से बहुत खुश रहते हैं तथा आपकी प्रत्येक मनोकामना को पूर्ण करते हैं। इस दिन श्री विष्णुसहस्रनाम का पाठ अवश्य करें। श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारे हे नाथ नारायण वासुदेवा । इस सुंदर भजन को समूह में गाइए। बालकृष्ण आप पर आशीर्वाद बरसा रहे हैं।

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