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वर्षा होते ही यहां की जमीन उगलने लगती है बेशकीमती हीरे, खुदाई कर श्रमिक करते हैं वर्षा की प्रतीक्षा..!

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जिले के बृजपुर और पहाड़ीखेड़ा क्षेत्र की हीरा धारित पट्टी क्षेत्र के जंगल, झरनों, नालों तथा नदियों के किनारे हीरेयुक्त मिट्टी (चाल) की धुलाई का काम तेज हो गया है। बारिश के सीजन में हर वर्ष चाल की धुलाई का काम परंपरागत तरीके से जोर पकड़ता है। जिले के हीरा धारित पट्टी क्षेत्र में भी हो रही बारिश के बाद यह काम बहुत तेजी से चल रहा है। खदानों में दर्जनों की संख्या में लोग लगे हुए हैं। पानी की उपलब्धता बढऩे के साथ ही नई वैध और अवैध हीरा खदानों के लगने का भी सिलसिला प्रारंभ हो गया है।

हीरा रोजगार का प्रमुख साधन

गौरतलब है कि पन्ना में हीरा रोजगार का प्रमुख साधन है। यही वजह है कि यहां प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से हजारों की संख्या में लोग हीरा के खनन, उसकी धुलाई और विक्रय आदि कार्यों में लगे हैं। बारिश होते ही नदी-नालों में पानी आ गया है इसलिए चाल की धुलाई का काम तेज हो चला है। हीरा धारित पट्टी क्षेत्र में इन दिनों जहां देखो वहीं चाल की धुलाई तथा हीरे की बिनाई का काम चल रहा है। मजदूर सुबह से जल स्रोतों के पास चाल धोने के लिए पहुंच जाते हैं तो पूरे दिन इसी काम में लगे रहते हैं। चाल को धोने के पश्चात उसे आसपास के क्षेत्र में सूखने के लिए डाल दिया जाता है। सूखने के बाद कंकड़ पत्थर से मजदूरों द्वारा हीरा बीना जाता है।

गर्मी में जलस्रोतों के पास कर लेते हैं भंडारित

हीरा कारोबार से जुड़े लोगों ने बताया, गर्मी के दिनों में पानी नहीं मिलता है। इससे धुलाई का काम नहीं होता है। गर्मी के दिनों में चाल को निकालकर जल स्रोतों के आसपास भंडारित कर दिया जाता है। वर्षा होते ही जल स्रोतों में पानी आने पर चाल की धुलाई का काम शुरू हो जाता है। करीब एक सप्ताह से हीरे के चाल की धुलाई का काम चल रहा है। इसमें खदानों में सैकड़ों की संख्या में मजदूर काम कर रहे हैं। हीरा विभाग द्वारा इस वर्ष अभी तक हीरा खदानों के लिए 456 पट्टे जारी किए गए हैं। यह पट्टे इटवा और पन्ना सर्किल के हैं। पन्ना सर्किल में कमलाबाई का तालाब, सकरिया (चौपरा), कृष्णा कल्याणपुर (पटी) और रक्सेहा की शासकीय जमीन के पट्टे जारी किए जाते हैं। दहलान चौकी के लिए निजी जमीनों में भी हीरा खदानों के लिए पट्टे जारी किए जाते हैं। वहीं इटमा सर्किल में किटहा, इटमांखास (बगीचा), बडग़ड़ी (मुड्ढ़ा हजारा), सिरस्वाह (भरका), रमखिरिया, मडफ़ा, सिरसा आदि क्षेत्र की उथली हीरा खदान शामिल हैं।

वैध से ज्यादा अवैध हीरा खदानें

हीरा कारोबार से जुड़े सूत्रों के अनुसार जिले के हीरा धारित पट्टी क्षेत्र में बृहस्पित कुंड के नीचे वाले क्षेत्र, पत्तालिया,रहुनिया, गुड़हा, पाली, पलथरा, इटवां, इटवा खास, खिरवा, बृजपुर, सिरस्वाहा सरकोहा, रानीपुरा, बिलखुरा दर्जनों ऐसे क्षेत्र हैं जहां अभी भी बड़़ी संख्या में हीरे की अवैध खदानें चल रही हैं। अवैध रूप से चल रही अधिकांश खदानें घनें जंगलों में तथा इतनी अंदर चल रही हैं कि वहां तक वाहनों से नहीं जाया जा सकता है। पैदल कार्रवाई दस्ते के पहुंचने से पहले ही लोग भाग जाते हैं। बृहस्पिकुंड का क्षेत्र सीमा विवाद को लेकर भी चर्चित है।

इसके अतिरिक्त बहुराष्ट्रीय कंपनी रियो टिंटों ने छतरपुर जिले के बकस्वाहा में बंदर प्रोजेक्ट के नाम से प्रास्पेक्टिंग के लिये खुदाई करने के पश्चात अनुमान लगाया था कि क्षेत्र में 20 हजार करोड़ के हीरों का भंडार है। कंपनी की ओर से जिस क्षेत्र में खनन के लिये जमीन की स्वीकृति मांगी जा रही थी वह क्षेत्र पन्ना टाइगर रिजर्व तथा नौरादेही अभ्यरणय सागर के बीच का क्षेत्र था। यह टाइगर मूवमेंट एरिया होने के अलावा सघन वन से घिरा हुआ था। यदि कंपनी को हीरा खनने के लिये अनुमति दी जाती तो 10 लाख से ज्यादा पेड़ों को काटना पड़ता। इससे पर्यावरणीय स्वीकृति नहीं मिलने के बाद कंपनी की तरफ से 24 सौ बंद पैकटों में 27 सौ कैरेट हीरे पन्ना स्थित हीरा कार्यालय में जमा कराए गए थे। दरअसल यह हीरा नहीं बिल्क हीरा खनने के लिये कचरा जैसे थे। इतनी छोटे हीरों की मार्केट में कहीं डिमांड नहीं होती थी। इन हीरों की कुल कीमत ढाई से तीन लाख रुपए ही होती। रियो टिंटो ने यहां आठ वर्ष तक काम किया था। इसके बाद वह प्लांट सरकार को सौंपकर चली गई। राज्य सरकार द्वारा अब इस खदान को निजी हाथों में देने के प्रयास किए जा रहे हैं।

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