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आइए जानें, उन 3 दिनों मेंं महिलाएं कैसे करेंं ठाकुरजी की सेवा

हमारे समाज में प्राचीन समय से ही महिलाओं को लेकर कई सारे ऐसे नियम है जो उन्‍हें झेलने पड़ते हैं। शास्‍त्रों के अनुसार मासिक धर्म के दिनों में महिलाओं के लिए सभी धार्मिक कार्य करने की मनाही हो जाती है। सिर्फ हिन्दू धर्म में ही नहीं, बल्कि ऐसा लगभग सभी धर्मों में हैं जिनके पीछे जो तथ्य बताया जाता है वो समझना काफी मुश्किल है।
प्रकृति ने नारी को ही ऐसी शक्ति दी है जो शिशु को जन्‍म दे सके ये गर्व की बात है इसपर गर्व होना चाहिए न की शर्म आनी चाहिए। लेकिन कुछ नियमों का पालन करना भी हमारा धर्म माना गया है। इस दौरान महिलाओं को अन्य लोगों से अलग रहने का नियम है क्यूंकी ऐसे में स्त्रियों को अपवित्र माना गया है। उस दौरान वे महिलाएं कहीं बाहर आना-जाना नहीं करती थीं। इस अवस्था में उन्हें एक वस्त्र पहनना होता था, ज़मीन पर सोना होता था और वे अपना खाना आदि कार्य स्वयं ही करती थीं।
इसके पीछे भी एक शास्‍त्रों में एक कथा है कि आखिर महिलओं को ऐसा हर महीने क्‍यों झेलना होता है। कहा जाता है कि एक बार ब्रहस्पती जो देवताओं के गुरु थे, इंद्र से नाराज़ हो गए। इस के चलते असुरों ने देवलोक पर आक्रमण कर दिया और इंद्र को अपनी गद्दी छोड कर भागना पडा। इंद्र मदद मंगने के लीए ब्रह्मा के पास पहुँचे।
ब्रह्मा जी ने इंद्र को बताया की उसे एक ब्रह्म-ज्ञानी की सेवा करके ब्रहसपती को वापस प्रसन्न करना पड़ेगा। अपने सर से यह पाप हटाने के लीए और अपना राज्य वापस पाने के लिये इंद्र ने पेड, जल, भूमि और स्त्री से अपने पाप का थोडा थोडा हिस्सा लेने का आग्रह किया। इसका एक हिस्‍सा महिला को मिला उनका मासिक धर्म स्‍त्री को मिला। कहते हैं मासिक धर्म के दौरान महिलायें ब्रह्म-हत्या का पाप ढो रही होती हैं, अपने गुरु की हत्या का पाप और गुरु के बीना भगवान नहीं मिलते इसलिए महिलाओं को मन्दिर नहीं जना चाहिये।
धार्मिक रिति रिवाज के अनुसार इस समय में पूजा नहीं करना चाहिए वहीं कुछ घरों में ऐसे समय में रसोई में जाना भी मना होता है सिर्फ हिंदू धर्म मे ही नही सभी धर्मो में इस तरह की मनाही है। कहते हैं कि इस समय महिलाओं से निकलने वाली अशुद्रध्‍यिां उनके आस पास के वातावरण के साथ साथ उनके पास के लोगों को भी प्रभावित करता है।

माहवारी और छूआछूत का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं एक भी कारण ऐसा नहीं है की मासिक धर्म के दौरान महिलाओं के साथ अछूतों जैसा व्यवहार हो। बस परंपरा के नाम पर अब भी यह चला आ रहा है। लेकिन बदलते समय के साथ अब कुछ इलाकों में इस हालत में धीरे-धीरे बदलाव आ रहा है। इसकी एक वजह महिलाओं का कामकाजी होना है तो दूसरी वजह पारिवारिक ढांचे का सिकुड़ना है।

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कुछ लोगों के मन में आता है कि इस समय वो जाप कर सकती है या न‍हीं तो आप जाप जरूर करें लेकिन माले की जगह उंगलियों का प्रयोग करें।  इन दिनों में ठाकुर जी की सेवा एकदम नहीं करना चाहिए हो सके तो आप अपने परिवार के किसी और सदस्‍य से भोग लगवाएं। आजकल एकल परिवार है तो आप कुछ सूखा भोग भी लगा सकते हैं जैसे दुध, मिक्‍चर, बिस्‍कुट या और कुछ जो आपसे बन पाए।
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